हरियाणा सरकार द्वारा स्कूलों को 10 वर्ष के बाद फार्म भरकर मान्यता लेने को हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ ने बताया नियमों के विरुद्ध
134-ए की प्रक्रिया के तहत पढ़ रहे छात्रों की फीस पिछले 3 वर्षो से नहीं मिलने से स्कूल संचालकों में रोष
सरकार द्वारा स्कूलों को 10 वर्ष के बाद फार्म भरकर मान्यता लेने को हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ ने नियमों के विरुद्ध बताया है। वहीं सरकार द्वारा संचालित 134-ए की प्रक्रिया के तहत पढ़ रहे छात्रों की फीस पिछले 3 वर्षो से स्कूलों को नहीं मिली है। इससे स्कूल संचालकों में रोष है। वहीं आरटीई के तहत मिलने वाली राशि भी 4 साल से नहीं ली है। इन सब समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर शुक्रवार को हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ से जुड़े जिले के स्कूल संचालकों ने ऋषिकुल वर्ल्ड एकेडमी स्कूल में बैठक की।
बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान एवं शिव मॉडर्न वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के संचालक अजमेर सिंह ने की। मुख्य तौर पर हरियाणा यूनाइटेड स्कूल एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान विजेंद्र मान शामिल हुए। पदाधिकारियों ने बस पासिंग में होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए सोनीपत में बस पासिंग की सुविधा जल्द से जल्द उपलब्ध कराने की मांग की। प्रधान विजेंद्र मान ने बताया कि सरकार की तरफ से पहले यह हिदायत दी गई थी कि 1 अप्रैल को बच्चों की उम्र 6 साल होने पर बच्चों का दाखिला लिया जाएगा लेकिन अब नियमों में संशोधन करते हुए 30 सितंबर तक बच्चों की आयु 6 साल होने पर दाखिला देने की बात कही गई। इसके अलावा बैठक में प्ले स्कूल के संचालकों को इस बात की जानकारी दी गई कि वह सरकार की हिदायतों को पूरा करें जिसको लेकर सरकार द्वारा सख्त कदम उठाए गए हैं।
मुख्यमंत्री से मिलेगा प्रतिनिधि मंडल: संघ के जिला प्रधान अजमेर सिंह कहा कि जल्द ही मुख्यमंत्री से समय लिया जाएगा। सीएम से मिलकर सभी मुद्दों का समाधान निकाला जाएगा। सरकार निजी संस्थानों को अपना सहयोग प्रदान करें जिससे सकारात्मक सोच के साथ – साथ शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति की जाए। इस अवसर पर राई ब्लाक के प्रधान जगबीर शर्मा, खरखौदा ब्लाक के प्रधान सत्यदेव शर्मा, गन्नौर ब्लाक के प्रधान सुशील त्यागी के साथ-साथ अन्य ब्लाक प्रधान, एस 7 स्कूल के संचालक दीपक शर्मा, ऋषिकुल स्कूल के संचालक नीरज, सरस्वती स्कूल मुरथल के संचालक दलबीर, डीएवी स्कूल के प्रधानाचार्य वीके मित्तल, इंडियन स्कूल के प्रधानाचार्य राजेन्द्र गाहल्याण एवं लगभग 100 से ज्यादा स्कूलों के संचालक उपस्थित रहे।



