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गोहाना में 988वें नेत्रदाता बने मनोहर लाल गाबा

श्मशानघाट में अंत्येष्टि कुंड के निकट हुआ नेत्रदान टीम के विलंब से पहुंचने से शुरु हो गई शवयात्र

गोहाना :- 19 दिसम्बर : मंगलवार की देर शाम गोहाना शहर ने नेत्रदान का एक गौरवशाली अध्याय रचा। नेत्रदान के लिए टीम के न पहुंचने पर आदर्श नगर से शवयात्रा भी प्रारंभ हो गई लेकिन श्मशानघाट में टीम के पहुंचने की प्रतीक्षा हुई। दिल्ली से टीम आई । नेत्रदान हुआ। उसके बाद सूर्यास्त के उपरांत अंतिम संस्कार हुआ। रक्तदान-नेत्रदान-देहदान के लिए समर्पित संस्था आहुति ने यह 988वां नेत्रदान आदर्श नगर निवासी मनोहर लाल गाबा (69) पुत्र रंगाराम गाबा का करवाया।

मनोहर लाल गाबा लंबे समय से अस्वस्थ थे। उन्होंने दोपहर बाद 1:15 बजे हांसी में आखिरी सांस ली। पार्थिव शरीर के गोहाना पहुंचने पर मृतक की पत्नी राजरानी गाबा, बेटे-बहू मोहित गाबा और भारती गाबा, बेटी-दामाद नीतू और राकेश, दीपिका और सोनू के साथ पोती ताश्वी और कीर्ति ने दिवंगत नेत्र अमर बनाने का निश्चय किया। गाबा परिवार की ओर से आहुति से नेत्रदान का आग्रह मृतक के भतीजे राजेश इंसां ने किया।

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अंतिम संस्कार के लिए घर से प्रस्थान का समय सायं 5 बजे का था। उम्मीद थी कि इससे पहले नेत्रदान हो ही जाएगा। पर ऐसा हो नहीं सका । दरियागंज, दिल्ली के श्रॉफ आई बैंक की टीम लेट हो गई। मजबूर हो कर 5:15 बजे शवयात्रा प्रारंभ हो गई।

श्मशानघाट में पहुंचते-पहुंचने अंधेरा घिर आया। लेकिन गाबा परिवार ने निश्चय किया कि चाहे कितना समय क्यों न लग जाए, दाह संस्कार तो नेत्रदान के बाद ही होगा।

ऐसे में अंत्येष्टि कुंड के समीप रखे पार्थिव शरीर का नेत्रदान शोक संतप्त समाज के समक्ष खुले में हुआ। ऐसे में सूरज के अस्त हो जाने के बाद ही अंतिम संस्कार संभव हो सका।

श्रॉफ आई बैंक से टेक्नीशियन आर. डी. शर्मा की आए। आहुति की टीम सुरेंद्र विश्वास, बंटी निरंकारी और सन्नी
निरंकारी पर आधारित रही।

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