पानीपत की तीसरी लड़ाई में मराठाओं द्वारा गोहाना में स्थापित शिवालय का जीर्णोद्धार प्रारंभ
262 साल पूर्व प्रतिष्ठित शिवलिंग और पिंडी हैं पूर्ण सुरक्षित, मूल रूप में नए भवन में होंगे स्थापित
गोहाना :-18 दिसम्बर: 1761 में हुई पानीपत की तीसरी लड़ाई के समय मराठाओं ने गोहाना में जिस शिवालय की स्थापना की थी, उसका जीर्णोद्धार प्रारंभ हो गया है। भोले बाबा का करिश्मा कि 262 साल पहले जिस शिवलिंग और पिंडी को तब स्थापित किया गया था, वे अब तक पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं तथा उन्हें सही-सलामत मंदिर के मुख्य परिसर में अस्थायी रूप से स्थापित कर दिया गया है। नए भवन में ऐतिहासिक शिवलिंग और पिंडी को ही विराजमान किया जाएगा और बदला नहीं जाएगा।
पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र में स्थित सनातन धर्म मंदिर शिवाला मस्तनाथ गोहाना क्षेत्र का सबसे प्राचीन शिव मंदिर है। पुरातन समय में इसे शिवालय कहते थे । शिवालय शब्द का अपभ्रंश शिवाला है। पानीपत की तीसरी लड़ाई में मराठा फौजों ने गोहाना में डेरा डाला था। तब उन्होंने युद्ध के मध्य भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए शिवालय की स्थापना की थी। तभी से वह शिवालय अपने मूल रूप में अस्तित्व में था, पर उसका भवन अत्यन्त जर्जर हो चुका था।
शिवाला मस्तनाथ का प्रबंधन लंबे समय से विचार कर रहा था कि शिवलिंग और पिंडी के दोहरे परिसरों का जीर्णोद्धार कर दिया जाए। लेकिन मोटे बजट के प्रस्ताव के समानान्तर वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में गोहाना नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन सुनील मेहता ने ऑफर दी कि जो मंदिर अपने पास से लगा सकता हौ, लगा दे, बाकी का समूचा व्यय वह वहन करेंगे। मेहता की इस पेशकश ने शिवलिंग और पिंडी के भवनों के दिन बहुरने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
75 लाख रुपए की लागत से जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। मंदिर के अध्यक्ष प्रवीण गोयल ने निर्माण कार्य के लिए कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी के चेयरमैन गोहाना के गवर्नमेंट कॉलेज के पूर्व चेयरमैन ओ.डी. शर्मा होंगे। सदस्य रूप में सुनील मेहता के साथ विनोद अग्रवाल, वीरेंद्र जैन, अशोक जैन, भोलाराम वर्मा, राम निवास सैनी और गोविंद गोयल को स्थान दिया गया है। निर्माण कमेटी का लक्ष्य है कि आठ महीने के समय में जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण हो जाए।
एक चमत्कार ने गोहाना शहर के शिव भक्तों को अपने आराध्य के प्रति नतमस्तक कर दिया है। आशंका थी कि शिवलिंग और पिंडी बदलने पड़ेंगे। लेकिन मराठा साम्राज्य द्वारा 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई के बीच जो शिवालय बनाया था, उसके शिवलिंग और पिंडी पूरी तरह से सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए। नए भवन में अब मराठा सरदारों द्वारा स्थापित मूल शिवलिंग और पिंडी को ही स्थापित किया जाएगा।
शिवलिंग और पिंडी को पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ मंदिर परिसर में ही अस्थायी रूप से स्थापित कर दिया गया है ताकि बरसों-बरस से जलाभिषेक करते आ रहे श्रद्धालुओं को हताश – निराश न होना पड़े। नया परिसर तैयार होते ही ऐतिहासिक शिव लिंग और पिंडी को तत्काल उसमें शिफ्ट कर दिया जाएगा।
सनातन धर्म मंदिर शिवाला मस्तनाथ के अध्यक्ष प्रवीण गोयल के अनुसार नए परिसर का जो आर्किटेक्ट होगा, वह ऐसा होगा कि शिवालय और शेष देवी-देवताओं की प्रतिमाएं अब एक ही छत के नीचे होंगी। कोई श्रद्धालु दायीं ओर से प्रवेश करेगा या बायीं ओर से, वह शिवालय में पूजा करते हुए समस्त देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेकर ही बाहर आएगा। सब देवी-देवता अब शिवाला मस्तनाथ में सिंगल छत के नीचे एक साथ विराजेंगे।
इस कार्य योजना को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए राम दरबार को भी अस्थायी रूप से शिफ्ट किया जाएगा। शिवाला मस्तनाथ में साईं बाबा का मंदिर अब की भांति भविष्य में भी अलग ही बना रहेगा। इस मंदिर में प्रत्येक गुरुवार को नियमित रूप से खुले भंडारे का आयोजन भी होता है।

