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गोहाना में श्रीराम शरणम मिशन का 90 दिवसीय अखंड जप यज्ञ का शुभारंभ

मौन का अर्थ मूक रहना नहीं, मनन करना : कृष्ण विज जी

 

गोहाना :-10 दिसम्बर : श्रीराम शरणम मिशन के प्रमुख कृष्ण विज जी रविवार को कहा कि मौन का अर्थ मूक रहना नहीं, मनना करना है। कृष्ण विज जी श्रीराम शरणम मंदिर में 90 दिन के वार्षिक अखंड जप यज्ञ का शुभारंभ कर रहे थे। शुभारंभ पर्व में गुरु मां रेखा विज जी ने अमृत वाण का मधुर पाठ किया।

कृष्ण विज जी ने कहा कि झगड़ों की जड़ खुद को सही समझना और हमेशा सही ठहराने की कोशिशें हैं। उन्होंने कहा कि निराहारी वह नहीं है जो भूखा रहता है, वास्तविक निराहारी वह है। जो अपनी इंद्रियों को संयम के तप से तपा लेता है।

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श्रीराम शरणम मिशन के प्रमुख ने कहा कि स्थिर जल में ही अपनी छवि देखी जा सकती है। जल में पत्थर मारोगे तो लहरें उठने पर छवि भी गायब हो जाएगी। उन्होंने कहा कि शरीर का पिंजर जलने के बाद किसी काम का नहीं रहेगा, अतः जीते-जी जो पुण्य बटोर सको, कमा लो । उन्होंने कहा कि भगवान जब जन्म देता है, तब हमारा मन पूरी तरह से निर्मल होता है। इसे द्वेष और ईर्ष्या से कोई दूसरा नहीं, हम स्वयं दूषित करते हैं। उन्होंने जोर दे कर कहा कि आंखों से देखने में भी संयम हो। जो देखें, अच्छा देखें । इसी तरह से वाणी से कभी गलत नहीं, सदैव अच्छा बोलें।

कृष्ण विज जी ने खुलासा किया कि प्रारंभ में जब स्वामी सत्यानंद जी महाराज ने साधना सत्संग प्रारंभ किया था, वह हरिद्वार में होता था और 21 दिन का होता था। जब भगत हंस राज जी महाराज ने इसे गोहाना में शिफ्ट किया, तब यह 90 दिन का होने लगा। उनके अनुसार अपने से बात करने का यह सर्वश्रेष्ठ अवसर है।

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