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दुख के जनक दो हैं-पहला है पाने की लालसा और दूसरा है खोने का भय-कृष्ण विज

गोहाना :- 30 अक्तूबर : दुख के जनक दो हैं-पहला है पाने की लालसा और दूसरा है खोने का भय। यह संदेश श्रीराम शरणम मिशन के प्रमुख पूज्य पिता कृष्ण विज जी ने किया। वह मेन बाजार स्थित सनातन धर्म मंदिर में प्रवचनों की भागीरथी प्रवाहित कर रहे थे। इस अवसर पर अमृत वाणी का पावन पाठ गुरु मां रेखा विज जी ने किया।

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अमृत वाणी के इस सत्संग की अध्यक्षता सनातन धर्म मंदिर के अध्यक्ष संजय मेहंदीरत्ता ने की। अपने आशीर्वचनों में श्रीराम शरणम प्रमुख ने कहा कि अगर सुख चाहते हो, अपनी 19 इंद्रियों को 20वीं इंद्री आत्मा से जोड़ लो। जिस दिन आप आत्मा की आवाज सुनने लगोगे, आप से कोई गलत काम नहीं होगा।

कृष्ण विज जी ने कहा कि केवल राम के नाम से ही भव सागर से पार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आत्मा अजर, अमर और अविनाशी है। नश्वर केवल काया है।

इस अवसर पर सोनीपत विहिप के पूर्व जिला अध्यक्ष राम कुमार मित्तल, श्री दुर्गा भवन मंदिर के अध्यक्ष गुलशन नारंग, नगर पार्षद अंजू कालड़ा और पूर्व पार्षद जीतेंद्र उर्फ सीटू गेरा के साथ सुरेश मल्होत्रा, गोपाल दास गेरा, गुलशन उप्पल आदि प्रतिष्ठित नागरिक भी मौजूद रहे।

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