गोहाना में शासन-प्रशासन के बाल मजदूरी रोकने के अभियान केवल कागजी कार्रवाई हो रही है साबित
गोहाना :- शासन-प्रशासन के बाल मजदूरी रोकने के अभियान केवल कागजी कार्रवाई ही साबित हो रहे हैं। इसी लाचार व्यवस्था के चलते छोटी उम्र के बच्चे पेट के पालने के लिए बाल मजदूरी करने को बाध्य हो रहे हैं। गोहाना शहर में जहां कई बच्चे दुकानों पर बाल मजदूरी करते नजर आते हैं तो कई बिना पैरों में चप्पल और तन पर पूरे कपड़े डाले ही सुबह से सामान उठाकर बाल मजदूरी के लिए निकल रहे हैं। यहां तक की सामान की बिक्री न होने पर वे लोगों से रुपए व खाद्य सामग्री मांगकर खा रहे हैं। अभिभावक कमाई के लालच में जहां उनकी शिक्षा पर कोई ध्यान नहीं दे रहे, वहीं संबंधित विभागों के अधिकारी भी आंख बंद करके बैठे हैं। इस पर शहर के लोगों का कहना है कि यह शासन-प्रशासन की लापरवाही है, क्योंकि बाल मजदूरी रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसे में बच्चों को उनके अधिकार दिलाने व उन्हें बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा उनका उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए शासन-प्रशासन को अपनी चुप्पी तोड़नी होगी।


