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अस्पतालों के डिलीवरी और नवजात शिशु के टीकाकरण का डाटा एचएमआईएस पोर्टल पर अपलोड नहीं करने कारण, वैक्सीनेशन के आंकड़ों का नहीं हो रहा मिलान

गोहाना:- सिविल अस्पताल प्रशासन ने शहर के प्राइवेट अस्पतालों ने डिलीवरी का डाटा मांगा है। अस्पतालों को जुलाई और अगस्त का डाटा उपलब्ध करवाना है। इसके साथ ही अस्पतालों को डिलीवरी और नवजात शिशु के टीकाकरण का डाटा एचएमआईएस पोर्टल पर भी अपलोड करना है। जानकारी अपलोड नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग के नवजात शिशुओं के वैक्सीनेशन के आंकड़ों का मिलान नहीं हो रहा है। शहर में सिविल अस्पताल के साथ-साथ 15 प्राइवेट अस्पतालों में महिलाओं की डिलिवरी होती है। सिविल अस्पताल में डिलिवरी की सुविधा निशुल्क है। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में डिलीवरी के लिए भारी भरकम फीस ली जाती है। इसके बावजूद भी प्राइवेट अस्पतालों में प्रतिदिन करीब छह से सात महिलाओं की डिलीवरी होती है। मोटी फीस चार्ज करने के बाद भी कई प्राइवेट अस्पताल डिलिवरी और नवजात शिशु के वैक्सीनेशन का डाटा स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर अपलोड नहीं करते हैं। इससे विभाग को नवजात शिशुओं के वैक्सीनेशन का सही आंकड़ा नहीं मिल पाता है।

जबकि सभी अस्पतालों के लिए यह जानकारी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। सिविल अस्पताल में नवजात शिशु के लिए टीकाकरण वार्ड। प्राइवेट अस्पतालों में हुई डिलीवरी का आंकड़ा शहर के प्राइवेट अस्पतालों में अप्रैल माह में 169 महिलाओं की डिलिवरी हुई थी। मई माह में आंकड़ा कम होकर 140 पर आ गया। वहीं जून माह में डिलिवरी का आंकड़ा 207 तक पहुंच गया। प्राइवेट अस्पतालों ने स्वास्थ्य विभाग को जुलाई और अगस्त माह में हुई डिलिवरी की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करवाई है।

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इसलिए जरूरी है पोर्टल पर वैक्सीन का डाटा अपलोड करना शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए जन्म के बाद से ही शिशुओं को वैक्सीन की डोज देने का कार्य शुरू हो जाता है। जन्म के बाद पहले ही दिन जीरो डोज दी जाती है। इसके बाद समय-समय पर शिशुओं को पांच वर्ष की आयु तक वैक्सीन लगाई जाती है। सरकारी अस्पतालों में यह डाटा साथ-साथ ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाता है। जबकि कई प्राइवेट अस्पताल यह जानकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं करते हैं। ऐसे में प्राइवेट अस्पताल में जन्मे शिशु को किसी सरकारी अस्पताल में वैक्सीन लगाने के लिए लेकर जाते हैं, तो आधार नंबर से शिशु को लगाई गई वैक्सीन की रिपोर्ट देखी जाती है। पोर्टल पर जानकारी अपलोड नहीं होने के चलते स्वास्थ्यकर्मियों को शिशु को पहले लगी हुई वैक्सीन की जानकारी नहीं मिलती है।

^ प्राइवेट अस्पतालों से डिलीवरी की रिपोर्ट मांगी है और डिलीवरी और वेक्सीनेशन की रिपोर्ट पोर्टल पर नियमित रूप से अपलोड करने के भी निर्देश दिए हैं। – डॉ. दिनेश छिल्लर, एसएमओ।

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