‘इंसान के समानांतर चल रही एआई, कहीं आगे भी’
एसजीटीयू में एआईयू की नार्थ जोन कांफ्रेंस का आयोजन


एआई को लेकर अनेक आशंकाओं, संभावनाओं, चुनौतियों पर हुआ गंभीर चिंतन
गुरुग्राम, 17 अक्टूबर । एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी (एआईयू) और एसजीटी यूनिवर्सिटी द्वारा आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आयोजित एआईयू नार्थ जोन कांफ्रेंस में वक्ताओं ने विविध ज्वलंत मुद्दों, जिज्ञासाओं और संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
‘उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभावी समावेश: अवसर, चुनौतियां और भविष्य पर प्रभाव’ विषय पर एसजीटी परिसर में आयोजित कांफ्रेंस में विचारकों, शिक्षकों, थिंक टैंक की ओर से अनेक तर्क वितर्क देकर निष्कर्ष तौर पर कहा गया कि एआई तो आ चुकी, इसके विरोध का, आशंकाएं जताने का समय जा चुका। वक्ताओं ने कुछ इस तरह के विचार प्रकट किए- मानव के समानांतर (कहीं-कही आगे भी) चल रही है एआई, कैटलिस्ट (उत्प्रेरक) बन रही एआई, इंटरसेप्टर बन रही एआई, एआई ट्रेंड नहीं हुए तो रिप्लेस कर दिए जाएंगे शिक्षक, एआई ने पैदा हुआ विश्वास का संकट,
इंसानी दिमाग का स्थान नहीं ले सकती एआई, मास्टर नहीं-असिस्टेंट है एआई, एडमिशन से डिग्री पाने तक एआई के बिना काम नहीं चलने वाला, संवाद को खत्म कर दिया एआई ने आदि आदि।
कार्यक्रम की शुरुआत
परंपरागत दीप प्रज्वलन और विश्वविद्यालय के छात्रों के गीत ‘ज्ञान की हलचल’ से हुई।
एसजीटी विवि के कुलपति बी जे राव ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि विश्व में एक नई एंटिटी एआई का प्रवेश हो चुका जो इंसान के समानांतर और कहीं कहीं आगे चल रही है। उच्च शिक्षा में यह गाइड भी बन रही है।
मुख्य अतिथि
राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान की कुलपति प्रो. (डॉ.) शशिकला वंजारी ने कहा कि एआई आज डे-टुडे ट्रांजेक्शन की आवश्यकता बन चुकी। ‘सोल टु सिस्टम’ का रेफरेंस देकर उन्होंने एआई को व्यापक संदर्भ में समझाया। उन्होंने कहा कि एआई ने संवाद को खत्म कर दिया है। इस दौर में जिन्हें एआई की कम जानकारी है, उनके लिए सबसे बड़ा चैलेंज सामने है। एआई से विश्वास का संकट खड़ा हो रहा है। एआई के इस्तेमाल में थोड़ी सी भी चूक बड़ा नुकसान कर सकती है। एआई की प्रतिकूलता को अनुकूलता में बदलना होगा।
भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल ने अपने संबोधन में एआईयू के व्यापक फलक की चर्चा करते हुए कहा कि यह विश्व की सबसे बड़ी शिक्षा संस्था है जिससे 1200 से अधिक यूनिवर्सिटी जुड़ी हैं। एआई पर उन्होंने कहा, एआई से डरें नहीं। यह सोचें कि एआई इनेबल्ड यूनिवर्सिटी का निर्माण कैसे हो। एआई मास्टर नहीं, असिस्टेंट है, इसे अटैंड करें अन्यथा टीचर रिप्लेस कर दिए जाएंगे। एआई से छात्रों की अंडरस्टैंडिंग बढ़ रही है। उन्होंने रामानुजन केंद्र के लिए एसजीटी यूनिवर्सिटी की प्रशंसा की।
मास्टरसॉफ्ट ईआरपी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर के शैक्षणिक सलाहकार पारस ए. पलसाटकर ने मैनुअल से आटोमैटिड मैथड से अपने संबोधन की शुरुआत की। ईआरपी, एलएमएस, अटेंडेंट डैशबोर्ड व कई अन्य तकनीकी शब्दावली का प्रयोग करते हुए एआई की चुनौतियों को गिनवाया। छात्र समुदाय एआई पर पूरी तरह आश्रित हो गया है। उन्होंने आंकड़े भी गिनाए।
प्रो. (डॉ.) संदीप संचेती, उपाध्यक्ष, एल्सेवियर इंडिया ने सौ साल पहले की मशीन, हाइड्रोलिक उपकरणों का जिक्र किया। प्लेग, कोरोना का भी उल्लेख किया और कहा कि अब नई सदी न्यू इलेक्ट्रिसिटी (एआई) आ चुकी।
डॉ. अमरेंद्र पाणि, संयुक्त निदेशक एवं प्रमुख, अनुसंधान प्रभाग, भारतीय विश्वविद्यालय संघ ने भी सत्र को संबोधित किया।
इसके बाद तीन तकनीकी सत्रों में एआई के विविध पहलुओं पर गहन मंथन हुआ।
पहले सत्र का संचालन
डॉ. आस्था चौधरी, निदेशक, सीईएपीएस , एसजीटी यूनिवर्सिटी ने किया जिसमें प्रो. (डॉ.) श्रुति पाटिल — निदेशक, सिम्बायोसिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंस्टीट्यूट।
प्रो. (डॉ.) राजीव कुमार सिंह, डीन एवं प्रोफेसर, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, शिव नाडर यूनिवर्सिटी।
प्रो. (डॉ.) अमरजीत कौर , डीन, अकादमिक मामले, गुरुग्राम विश्वविद्यालय तथा विद्यार्थी पैनल सदस्य सुश्री सना अहमद, एसबीएससी शामिल हुए
दूसरे सत्र की थीम थी:
अनुसंधान में नवाचार एवं संस्थागत रूपांतरण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता
इस सत्र के मॉडरेटर: डॉ. राजीव गुलाटी सलाहकार, अनुसंधान विकास एवं नवाचार, एसजीटी विश्वविद्यालय रहे।
इसमें प्रो. (डॉ.) संदीप संचेती उपाध्यक्ष, एल्सेवियर इंडिया , प्रो. (डॉ.) नूपुर प्रकाश कुलपति, द नॉर्थकैप यूनिवर्सिटी प्रो. (डॉ.) मानव भटनागर प्रमुख एवं कार्यक्रम निदेशक, भारती स्कूल ऑफ टेलीकॉम टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, आईआईटी दिल्ली,
प्रो. (डॉ.) शैलेश कुमार वैज्ञानिक-IV, ब्रिक-एनआईपीजीआर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार शामिल हुए।
तीसरे सत्र का विषय रहा
गतिशील परिप्रेक्ष्य में उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उद्योग-अकादमिक सहयोग एवं शासन व्यवस्था
पैनलिस्ट:
प्रो. (डॉ.) वी.आर. रघुवीर — कुलपति, एसआरएम विश्वविद्यालय,
प्रो. (डॉ.) ममता अरोड़ा — प्रोफेसर, कंप्यूटर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, एमआरयू; गूगल प्रमाणित इनोवेटर एवं प्रशिक्षक।
विद्यार्थी पैनलिस्ट: सुश्री सुरति चतुर्वेदी, एसएचएसएल।
मॉडरेटर: डॉ. चांद सैनी प्रोफेसर एवं एसोसिएट डीन, एसजीटी ग्लोबल बिजनेस स्कूल, एसजीटी यूनिवर्सिटी।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. अमरेंद्र पाणि, संयुक्त निदेशक एवं प्रमुख, अनुसंधान प्रभाग, भारतीय विश्वविद्यालय संघ ने वोट आफ थैंक्स किया।



