‘विभाजन की त्रासदी आज भी पीड़ितों के अनुभवों में मौजूद’
एसजीटीयू में संवादात्मक सत्र आयोजित, मानवीय संवेदनाओं व साझा संस्कृति पर चर्चा

गुरुग्राम, 10 अक्टूबर । एसजीटी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज, सोशल साइंसेज एंड लिबरल आर्ट्स के अंग्रेजी विभाग द्वारा ‘विभाजन का साहित्य: सीमाओं के पार मिलने वाली सीख’ विषय पर अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज में अंग्रेजी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. माया जोशी ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में अतिथि का स्वागत करते हुए स्कूल की डीन प्रो. (डॉ.) शम्मी नागपाल ने कहा कि भारत विभाजन की त्रासदी आज भी इसके पीड़ितों और जीवित बचे लोगों के अनुभवों में मौजूद है। उन्होंने इस विषय पर चर्चा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने डॉ. जोशी को विश्वविद्यालय के मीडिया सेंटर और बरिस्ता प्रशिक्षण केंद्र का भ्रमण भी कराया। डॉ. जोशी ने एसजीटी यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को उपलब्ध कराए जा रहे व्यावहारिक एवं अनुभव-आधारित शिक्षण अवसरों की सराहना की।
यह सत्र पारंपरिक व्याख्यान से अलग एक संवादात्मक और विचारोत्तेजक चर्चा के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों को स्थान मिला। विद्यार्थियों ने भी इसमें सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने विचार साझा किए।
डॉ. जोशी ने विभाजन के विमर्श के केंद्र में मानवीय संवेदनाओं को रखते हुए महिलाओं के अनुभवों, पुरुषों पर पड़े इसके प्रभावों तथा विभाजन और पारिस्थितिकी के बीच संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए ‘टोबा टेक सिंह’, ‘द डॉग ऑफ टेटवाल’, ‘पेशावर एक्सप्रेस’, ‘हम वहशी हैं’ और ‘लाजवंती’ जैसी साहित्यिक रचनाओं के साथ-साथ अनिरुद्ध कला की पुस्तक ‘द अनसेफ एसाइलम’ के संदर्भ भी प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण लेडी श्रीराम कॉलेज में आयोजित छात्र विनिमय कार्यक्रम का उनका अनुभव रहा। इस दौरान लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज के विद्यार्थियों ने विभाजन से जुड़े अपने अनुभवों और दृष्टिकोणों को साझा किया। इस संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों ने महसूस किया कि सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच भाषाओं, संस्कृतियों और खानपान की अनेक समानताएं आज भी मौजूद हैं।
कार्यक्रम के अंत में अंग्रेजी विभाग की सहायक प्रोफेसर एवं संयोजक डॉ. गिरिजा सूरी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने डॉ. माया जोशी, विश्वविद्यालय प्रशासन, डीन प्रो. (डॉ.) शम्मी नागपाल के निरंतर प्रोत्साहन, सह-संयोजक डॉ. पलक अरोड़ा एवं डॉ. कनिका गोदारा, स्कूल के सदस्यों तथा विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।



