त्रासदी बरोदा गांव के सरकारी कॉलेज की : असुरक्षित घोषित जर्जर भवन, सब्जेक्ट चार ही होने से ऑप्शनल चुनने की छूट नहीं, यही सब्जेक्ट पढ़ने होंगे, चारों प्राध्यापक डेपुटेशन पर
गोहाना :-7 जून : सवा चार साल हो चुके हैं बरोदा गांव के सरकारी कॉलेज को प्रारंभ हुए। लेकिन आज तक कॉलेज को अपना भवन नसीब नहीं हो सका । जिस सरकारी हाई स्कूल में 5 कमरों में कॉलेज चल रहा है, उसे कब का असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। कॉलेज में चार सब्जेक्ट हैं, ऐसे में ऑप्शनल सब्जेक्ट चुनने की कोई आजादी नहीं है तो नियुक्त चारों प्राध्यापक भी स्थायी न हो कर उधार के हैं जो सब डेपुटेशन पर नियुक्त हैं ।
हरियाणा सरकार ने बरोदा गांव में गवर्नमेंट कॉलेज 3 मई 2020 को प्रारंभ किया था। तभी से यह कॉलेज इसी भवन, जो पूरी तरह से जर्जर और आधिकारिक रूप से असुरक्षित घोषित किया जा चुका है, के 5 कमरों में घिसट रहा है। पांचों कमरे टूटे-फूटे हैं जिनकी छतों से हमेशा प्लास्टर झड़ता रहता है। कमरों की हालत यह है कि वे कभी भी धराशायी हो कर किसी बड़े हादसे को अंजाम देने के लिए बेकरार लगते हैं।
पहले इसी स्कूल में मंडलाना शैक्षणिक खंड का बी.ई.ओ. कार्यालय चलता था। जब यह कार्यालय गोहाना शहर में सेक्टर 7 के गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति स्कूल में शिफ्ट हुआ, तब उससे रिक्त हुए बी.ई.ओ. कार्यालय में सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल का दफ्तर बना दिया गया। शेष चार कमरों में एक कमरे में
कार्यालय तो शेष तीन कमरों में बी. ए. के प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की कक्षाएं लगती हैं। कॉलेज में पहले दिन से जो बी.ए. स्ट्रीम थी, बस वही है, न कॉमर्स जुड़ी, न साइंस ।
गवर्नमेंट हाई स्कूल के जिन कमरों में बरोदा गांव का सरकारी कॉलेज चल रहा है, उस भवन को असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। इस के बावजूद कमरों को प्रयोग करने का जोखिम लिया जा रहा है। कॉलेज पूरे छह बार उच्चतर शिक्षा निदेशालय को भवन की जर्जर हालत से अवगत करवा चुका है। निदेशालय ने जिला प्रशासन को लिख कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली। कुंभकर्णी नींद शायद उस दिन खुलेगी जिस दिन कोई बड़ा हादसा दस्तक दे देगा ।
बी. ए. की केवल 80 सीट हैं। पिछले साल आधे के करीब दाखिले हुए। बाकी की सीटें खाली की खाली रह गईं। बी.ए. के लिए न्यूनतम विषय चार होते हैं। इस कॉलेज में केवल हिंदी, अंग्रेजी, हिस्ट्री और पॉलिटिकल साइंस अवेलेबल हैं यानी जिसने पढ़ने हैं, यहीं चारों सब्जेक्ट पढ़ने होंगे, सब्जेक्ट की च्वाइस चाहिए तो दूसरे
कॉलेजों का रास्ता नापिए ।
इन चार विषयों के प्राध्यापक उधार के हैं। ये प्राध्यापक
दुसरे कॉलेजों से डेपुटेशन पर भेजे गए हैं। वाइस प्रिंसिपल पवन लठवाल की मूल नियुक्ति गोहाना के सरकारी गर्ल्स कॉलेज की है। वह वाइस प्रिंसिपल के साथ हिस्ट्री के प्राध्यापक भी हैं।
इसी तरह से अंग्रेजी के अमरीश अत्री और हिंदी की प्रवीण देवी भी मूलत: शहर के गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज से हैं। प्रवीण देवी तीन दिन गोहाना और तीन दिन बरोदा में पढ़ाती हैं।
चौथे प्राध्यापक पॉलिटिकल साइंस के नसीब सिंह हैं। उनकी मूल नियुक्ति पानीपत के इसराना कस्बे में स्थित गवर्नमेंट कॉलेज की है। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. शमशेर हुड्डा अवश्य पूर्णकालिक हैं। लेकिन उनके पास भी रोहतक जिले के जसिया गांव स्थित गवर्नमेंट कॉलेज का एडिशनल चार्ज है।
राज्य सरकार यहां पॉलिटिकल साइंस की एम. ए. शुरु करना चाहती थी जिस का प्रस्ताव भवन के पर्याप्त न होने के चलते ठंडे बस्ते में चला गया।
त्रासदी बरोदा गांव के सरकारी कॉलेज की : असुरक्षित घोषित जर्जर भवन, सब्जेक्ट चार ही होने से ऑप्शनल चुनने की छूट नहीं, यही सब्जेक्ट पढ़ने होंगे, चारों प्राध्यापक डेपुटेशन पर


