नवाचारी होम वर्क निपुण कार्यक्रम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप नौनिहालों को ग्रीष्मावकाश के लिए मिला है अनूठा होम वर्क, दादा-दादी नानी-नानी होंगे मेंटर
परम्परागत शिक्षण लेखन और रटने की प्रवृत्ति के स्थान पर एक्सपीरियंस बेस्ड एजुकेशन के लिए नवाचारी होम वर्क दिया गया है। इससे इस ग्रीष्मावकाश में नन्हे-मुन्ने बच्चे एक जुलाई को छुट्टियां खत्म होने के बाद जब दोबारा स्कूल में पहुंचेंगे, वे अपने अभिभावकों से बहुत कुछ नया सीख चुके होंगे। बसंत ढिल्लों, बी.ई.ओ., मुंडलाना खंड
गोहाना :-27 मई : प्रदेश के स्कूल ग्रीष्मावकाश के लिए बंद हो चुके हैं। छुट्टियां 30 जून तक रहेंगी।
एक जुलाई को पुन: स्कूल लगेंगे। बाल वाटिका – 3 से कक्षा 5 के लिए इस बार नवाचारी होम वर्क निपुण कार्यक्रम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप दिया गया है। अपनी ही तरह का अनूठा यह होम वर्क दादा-दादी, नाना-नानी समेत परिवार के बड़े सदस्यों की मेंटर की भूमिका सुनिश्चित करेगा ।
मोबाइल फोन, कंप्यूटर और टी.वी. से दूर रखते हुए बच्चों को जिन गतिविधियों को अंजाम देना है, वे परिवार के साथ बच्चों के लगाव और जुड़ाव में वृद्धि करेंगी।
निंदिया के आगोश में खोने से पहले बच्चों को अपने दादा-दादी, माता-पिता और नाना-नानी के पांव दबाने होंगे तथा उनसे कहानी सुननी होगी ।
हर बच्चे को न्यूनतम एक कविता, भगवान की प्रार्थना, भजन, शब्द या धार्मिक प्रार्थना को कंठस्थ करना होगा। बच्चों को अपना पूरा नाम, माता- पिता भाई – बहन सहित परिवार के हर सदस्य के नाम को मौखिक रूप से याद करना है। बच्चों को तरबूज और खरबूजे के बीजों को साफ करने होगा तथा उनकी गिनती करते हुए 5-5, 10-10 के जोड़े बना कर रखना होगा।
बच्चों को घर के अंदर लूडो, सांप-सीढ़ी और कैरम जैसे खेल खेलने होंगे। उन्हें ये खेल अपने भाई-बहन, दादा-दादी या नाना-नानी के साथ खेलने होंगे। सुबह जल्दी उठ कर बच्चों को अपना बिस्तर खुद समेटना होगा। उसके बाद मॉर्निंग वॉक और योगाभ्यास करने होंगे ।
बच्चों को अपने नाना-नानी दादा-दादी के विवाह में बांटी गई मिठाइयों की जानकारी प्राप्त करनी है। उन्हें अपने इन बुजुर्गों से उनके बचपन के संस्मरण और उनके समय के खेलों के बारे में जानना होगा । बच्चों को दादा-दादी नाना-नानी की पसंदीदा फिल्म और सीरियल उनके साथ देखने होंगे।
बच्चों को चिकनी मिट्टी अथवा आटे को गूंथ कर उनकी गोलियां और खिलौने बना कर उनको धूप में सुखाना होगा। बच्चों को सप्ताह में कम से कम एक दिन टी. वी., मोबाइल फोन समेत सब इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों से पूरी तरह से दूर रहना होगा ।
बच्चों को अपने घरों में आने वाली चिड़ियों के लिए दाना और पानी का प्रबंध करना होगा ।

