गोहाना आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष और हरियाणा व्यापार मंडल के प्रदेश सचिव विनोद सहरावत ने आढ़तियों के पांच दिन के सांकेतिक धरने के तीसरे दिन कहा-सब फसलों की खरीद आढ़तियों के जरिए हो, मिले पूरी आढ़त
गोहाना :-2 अप्रैल : हम ज्यादा कुछ नहीं चाहते। हमारी मांग केवल इतनी है कि अनाज मंडी में बिकने के लिए जो भी फसल आए, वे सब फसलें आढ़तियों के जरिए खरीदी जाएं तथा आढ़तियों को हर खरीद पर पूरी आढ़त मिले।
बुधवार को यह मांग गोहाना आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष और हरियाणा व्यापार मंडल के प्रदेश सचिव विनोद सहरावत ने की। वह इस समय पूरे प्रदेश में चल रहे पांच दिन के सांकेतिक धरने के तीसरे दिन आढ़तियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दोहराया कि अगर पांच दिन के धरने के बाद भी आढ़तियों की मांगों को नहीं माना गया, आढ़ती अपने आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
विनोद सहरावत ने कहा कि वांछित तो यह था कि आढ़त बढ़ा दी जाती, लेकिन भाजपा सरकार ने पहले से लंबे समय से चल रही अढ़ाई प्रतिशत की आढ़त को घटा कर दो प्रतिशत कर दिया । यह वही भाजपा है जिसने चुनाव के समय वायदा किया था कि उसके सत्ता में आने पर आढ़त को तीन प्रतिशत किया जाएगा।
आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि आढ़त को बढ़ाया जाए या न जाए, लेकिन नैतिकता इस बात की अनुमति भी नहीं देती कि आढ़त को घटा दिया जाए। आढ़ती इतना भर चाहते हैं कि जहां उनको अढ़ाई प्रतिशत आढ़त हर खरीद पर दी जाए, वहीं अनाज मंडी में आने वाली हर फसल की खरीद आढ़तियों की मार्फत हो ।
डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि एक-एक आढ़ती ने सरकार को करोड़ों रुपए चुका कर दुकानें खरीद रखी हैं। यदि सरकार को फसलों को आढ़तियों के माध्यम से खरीदना ही नहीं है तो उसने इतनी महंगी दुकानें बेची ही क्यों। उन्होंने आरोप लगाया कि फसलों की सीधी खरीद से सरकार आढ़तियों को बर्बाद करने पर तुली हुई है।
नरेंद्र बंसल ने कहा कि आढ़त की एक दुकान से न्यूनतम 36 व्यक्तियों को रोजगार मिलता है। अगर सरकार को आढ़तियों के जरिए फसलों को खरीदना ही नहीं, आढ़त की दुकानों पर ताले लगा दो। भाजपा के सत्ता में आने के बाद एक भी सीजन ऐसा नहीं रहा जब सरकार ने आढ़तियों से कोई पंगा न लिया हो ।
तीसरे दिन के धरने पर रामधन भारतीय, रामधारी जिंदल, श्याम लाल वशिष्ठ, सुरेंद्र गर्ग, जिनेंद्र जैन, प्रदीप सूरा, संदीप शर्मा, संदीप मलिक, कृष्ण शर्मा, मुकेश जैन,
रमेश घड़वाल, सतबीर भावड़, मुरारी लाल सैनी, आजाद शर्मा आदि आढ़ती बैठे ।


