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एसजीटीयू में कैडेवर रिसीविंग समारोह का आयोजन, चिकित्सा अनुसंधान के लिए श्री कृष्ण आयुष विवि ने भेजा कैडेवर 

सेवा व मानवता के सर्वोच्च आदर्शों का प्रतीक है शरीर दान: डॉ नासा

गुरुग्राम, (अनिल जिंदल) 20 फरवरी । देश की प्रतिष्ठित गुरु गोबिंद सिंह ट्राई सेंटेनरी यूनिवर्सिटी (एसजीटीयू) की फैकल्टी ऑफ इंडियन मेडिकल सिस्टम (एफआईएमएस) ने चिकित्सा जगत में नई रिसर्च के लिए किए जाने वाले शरीर दान को सम्मान देने के लिए कैडेवर रिसीविंग समारोह का आयोजन किया।

इस अवसर पर प्रो वाइस-चांसलर, प्रो. (डॉ.) अतुल नासा, एफआईएमएस के डीन प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार शर्मा, एसोसिएट डीन डॉ. विद्यावती वी. हिरेमथ और एसजीटी आयुर्वेद अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. प्रवीण चौधरी सहित संकाय, कर्मचारी और छात्र उपस्थित थे। इस मौके पर श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय से एक कैडेवर प्राप्त किया गया।

समारोह की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों और पूजन के साथ हुई, जिसे सहायक प्रोफेसर व्यास ने संपन्न कराया। डॉ. अभिलाषा भारद्वाज, सहायक प्रोफेसर, विभाग रचना शरीर ने इस कार्यक्रम का समन्वय किया और डॉ. जगजीत सिंह, सहायक प्रोफेसर, विभाग रचना शरीर ने सुनिश्चित किया कि सभी प्रक्रियाएं गरिमा और संजीदगी के साथ संपन्न हों।

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सभा को संबोधित करते हुए डीन ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में कैडेवर ही आद्य गुरु है – पहला शिक्षक – जो छात्रों को मानव शरीर की जटिलताओं को समझने में मार्गदर्शन करता है। प्रो. (डॉ.) अतुल नासा ने यह भी कहा कि शरीर दान सेवा और मानवता के सर्वोच्च आदर्शों का प्रतीक है।

कैडेवरिक शपथ प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार शर्मा द्वारा ग्रहण कराई गई, जिसके बाद संकाय और छात्रों ने सामूहिक रूप से प्रतिज्ञा ली कि वे कैडेवर और चिकित्सा पेशे के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और नैतिक जिम्मेदारी बनाए रखेंगे। समारोह में भारत की समृद्ध चिकित्सा परंपरा का भी स्मरण किया गया, जिसमें शल्य चिकित्सा के पिता सुश्रुत का उल्लेख हुआ, जिन्होंने कैडेवर का विवेचन करने के महत्व पर जोर दिया।

दानकर्ता और उनके परिवार का सम्मान करने हेतु एक मिनट का मौन रखा गया, उसके बाद सभी गणमान्य व्यक्तियों, संकाय और छात्रों ने पुष्पांजलि अर्पित की।

इस कार्यक्रम के माध्यम से एफआईएमएस ने करुणा, नैतिक अभ्यास और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, महादान की भावना और चिकित्सा शिक्षा की स्थायी विरासत का सम्मान किया।

 

 

 

 

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