जल प्रदूषण रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा चलाया गया विशेष निरीक्षण अभियान, डीसी के नेतृत्व में 8 टीमें गठित कर किया गया जिला में उद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण
पर्यावरण मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नही, नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त से सख्त होगी कार्रवाई - डीसी


निरीक्षण के दौरान टीमों द्वारा ईटीपी व एसटीपी के इनपुट और आउटपुट से लिए गए जल के नमूने, परीक्षण हेतू भेजे एचएसपीसीबी की प्रयोगशाला
सोनीपत, 18 फरवरी। जिला में ड्रेन नंबर 6 व मुंगेशपुर ड्रेन के जल की खराब गुणवत्ता तथा औद्योगिक इकाइयों द्वारा संभावित रूप से अनुपचारित अपशिष्ट जल छोड़े जाने की आशंका को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया। बुधवार को उपायुक्त सुशील सारवान के नेतृत्व में 8 टीमों को गठन कर जिला में एक दिन का विशेष औचक निरीक्षण अभियान चलाया गया। इसके अलावा हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के सदस्य सचिव, पंचकूला द्वारा अन्य जिलों से अतिरिक्त 5 फील्ड अधिकारियों की भी ड्यूटी लगाई गई है, ताकि निरीक्षण कार्य प्रभावी ढंग से किया जा सके।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा चिन्हित 8 पॉकेट्स में यह अभियान चलाया गया। सभी टीमों में एचएसपीसीबी के फील्ड अधिकारी के साथ संबंधित विभाग के सहयोगी अधिकारी को शामिल किया गया। जिन्होंने नाथुपुर, अकबरपुर बरौटा, राठधना, बहालगढ़ रोड, पियाऊ मनियारी, कुंडली, मुरथल, लिवासपुर, रामनगर, धतूरी, सनपेड़ा, भिगान रोड, कामी रोड, लड़सोली व खरखौदा सहित विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया।
इस विशेष अभियान के दौरान विशेष फोकस उन जल प्रदूषणकारी उद्योगों पर रखा गया है जो कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) से जुड़े नहीं हैं तथा एचएसआईआईडीसी औद्योगिक क्षेत्रों के बाहरी जोन में संचालित हो रहे हैं। सभी 8 टीमों द्वारा संयुक्त रूप से निरीक्षण किए गए तथा संबंधित उद्योगों में स्थापित एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के इनलेट और आउटलेट से जल के नमूने लेकर परीक्षण हेतु एचएसपीसीबी प्रयोगशाला, फरीदाबाद भेजे गए हैं। अतिरिक्त उपायुक्त लक्षित सरीन व आरओ एचएसपीसीबी अजय मलिक भी निरीक्षण के दौरान टोमों के साथ रहे।
यह विशेष कार्रवाई स्पेशल एनवायरनमेंट सर्विलांस टास्क फोर्स (एसईएसटीएफ) सोनीपत की सिफारिशों पर की गई है, जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त लक्षित सरीन सोनीपत द्वारा की गई। इसका उद्देश्य भारत सरकार एवं हरियाणा सरकार द्वारा जारी सख्त निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना तथा जिले से गुजरने वाले ड्रेनों में अवैध डिस्चार्ज पर रोक लगाना है, जिससे यमुना नदी की जल गुणवत्ता में सुधार हो सके।
उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि जल प्रदूषण की रोकथाम को गंभीरता से लेते हुए उद्योगों को औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उद्योगिक इकाईयों की जांच की गई, पानी के नमूने लिए व उन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि पर्यावरण मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नही की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी ऐसे निरीक्षण अभियान निरंतर जारी रहेंगे।
उपायुक्त ने जिला में संचालित सभी उद्योगों से अपील की है कि वे अपने एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट एवं सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का नियमित संचालन सुनिश्चित करें, एचएसपीसीबी एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप ही डिस्चार्ज करें तथा उपचारित जल का पुन: उपयोग उत्पादन प्रक्रिया में करें।
क्षेत्रीय अधिकारी, एचएसपीसीबी सोनीपत अजय मलिक ने बताया कि प्रयोगशाला से विश्लेषण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिन इकाइयों/प्रोजेक्ट्स के नमूने निर्धारित मानकों से अधिक पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी।

