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माडू सिंह मेमोरियल आयुर्वेद संस्थान में नव आगंतुक छात्राओं के अठारह दिवसीय संस्कार कार्यक्रम का हुआ समापन 

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खानपुर कलां / गोहाना, (अनिल जिंदल) 22 दिसम्बर। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां के माडू सिंह मेमोरियल आयुर्वेद संस्थान में आयुर्वेद स्नातकोत्तर में प्रथम वर्ष की नव आगंतुक छात्राओं के लिए चल रहे अठारह दिवसीय संस्कार कार्यक्रम का आज समापन हो गया।

समापन सत्र में महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुदेश ने बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शिरकत की। वहीं कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में जानकीदास पब्लिक स्कूल की प्राचार्य डॉ गीतांजलि ग्रोवर ने छात्राओं को सम्बोधित किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ नरेश भार्गव ने किया।

कुलपति प्रो सुदेश ने कहा कि संस्कार कार्यक्रम का उद्देश्य केवल औपचारिक परिचय तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह छात्राओं के शैक्षणिक जीवन की सुदृढ़ नींव रखने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि इन अठारह दिनों में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपराओं, अनुशासन, मूल्यों, आयुर्वेदिक दर्शन, आचार संहिता, अनुसंधान की दिशा तथा नैतिक उत्तरदायित्वों से स्वयं को परिचित किया है। कुलपति ने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र शैली है। यह शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का विज्ञान है। प्रो सुदेश ने स्नातकोत्तर छात्राओं को कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको इस प्राचीन एवं वैज्ञानिक ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है। आज के आधुनिक युग में आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ रही है, और आप ही इस परंपरा की भविष्य की वाहक हैं।

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कुलपति ने कहा कि ज्ञान के साथ-साथ करुणा, संवेदनशीलता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को भी अपने व्यक्तित्व का अभिन्न अंग बनाएं। अनुसंधान, नवाचार और सेवा भावना के साथ अपने अध्ययन को आगे बढ़ाएं, ताकि आप समाज और राष्ट्र के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

अपने संबोधन में डॉ गीतांजलि ग्रोवर ने कहा कि आयुर्वेद हमारी अतीत की परम्परा है और भविष्य की दिशा है। हमारी संस्कृति अतीत से जुड़ी है और हमें अपनी संस्कृति पर गर्व है। आज हर जगह से हारने के बाद लोगों को आयुर्वेद जरूरी लगता है। डॉ ग्रोवर ने कहा कि यह संस्थान नारी से नारायणी तक के सफर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि सेवा व अनुशासन को जीवन का आधार बनाएं। अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धावान रहें। उन्होंने कहा कि एक अच्छे शिष्य की तरह हमेशा जिज्ञाशु बनें। आयुर्वेद हमारी प्राचीन पद्धति है, इसको वापिस लाना हम सब की जिम्मेदारी है। डॉ ग्रोवर ने योग और ध्यान पर बल देते हुए कहा कि हमें सात्विक भोजन करना चाहिए , क्योंकि जैसे खाएंगे अन्न वैसा रहेगा मन। उन्होंने कहा कि अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखें।

आयुर्वेद संस्थान के प्राचार्य डॉ ए पी नायक ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। कार्यक्रम के संयोजक डॉ नरेश भार्गव ने पुरे संस्कार कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी।

स्नातकोत्तर छात्राओं ने अठारह दिवसीय कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की।

इस अवसर पर प्रो विजय कौशिक , डॉ जी के पांडा , डॉ महेश शर्मा , डॉ दीपमाला व डॉ शोभा बेंजवाल भी मौजूद रहे।

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