सेठ_चौधरी_छाजूराम_लाम्बा_जयंती

#सेठ_चौधरी_छाजूराम_लाम्बा_जयंती। 🙏🙏। दानवीर सेठ चौधरी छाजूराम लांबा का जन्म 28 नवंबर 1861 में भिवानी (हरियाणा) के #अलखपुरा गांव में हुआ था …..!
1883 में वे रोजगार की तलाश में कलकत्ता चले गए जहाँ पर धीरे धीरे उनकी गिनती कलकत्ता के बडे व्यापारियों में होने लगी और एक दिन वे अपनी लगन और परिश्रम से कलकत्ता के सबसे बडे जूट व्यापारी बन गए।लोग उन्हें जूट का बादशाह (जूट किंग) कहने लगे।
#छाजूराम जी – रहबरे-आज़म चौधरी छोटूराम के धर्म-पिता भी थे | इन्होंने रोहतक में चौ. छोटूराम के लिए नीली कोठी का निर्माण भी करवाया (याद रहे चौ. छोटूराम जी को उच्च शिक्षा का खर्च वहन करने वाले चौ. छाज्जूराम ही थे)| कहा जाता है कि अगर चौ. छाज्जूराम जी नहीं होते तो चौ. छोटूराम जी भी नहीं होते और अगर चौ. छोटूराम नहीं होते तो किसानो के पास आज भूमि नहीं होती ….!
#सेठ छाज्जूराम की दानदक्षता उस समय भारत में अग्रणीय थी| #कलकत्ता में रविंद्रनाथ टैगोर के शांति निकेतन से लेकर लाहौर के डी. ए. वी. कॉलेज तक कोई ऐसी संस्था नहीं थी, जहाँ पर उन्होंने दान न दिया हो| सेठ साहब ने शिक्षा के लिए लाखों रूपये के दान दिए, फिर वह चाहे हिन्दू विश्वविधालय बनारस हो, गुरुकुल कांगड़ी हो, हिसार-रोहतक (हरियाणा) व् संगरिया (राजस्थान) की #जाट_संस्थाए हों, हिसार और कलकत्ता की आर्य कन्या पाठशालाएं हों, हिसार का डी ए वी स्कूल हो अथवा अलखपुरा और खांडा खेड़ी के ग्रामीण स्कूल, हर जगह अपार दान दिया| इसके अलावा इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय दिल्ली, डी ए वी कॉलेज #लाहौर, शांति निकेतन, विश्व भारती में भी बार-बार दान दिए| आपने गरीब, असमर्थ व् होनहार बच्चों के लिए स्कालरशिप प्लान निकाले, जिसके तहत वो सैंकड़ों बच्चों की शिक्षा स्पांसर करते थे|
#कलकत्ता में रविन्द्र नाथ टैगोर के शांति निकेतन विश्वविद्यालय से लेकर लाहौर के डीएवी कॉलेज तक उस समय ऐसी कोई संस्था नहीं थी, जिसे सेठ छाजूराम ने दान न दिया हो। #बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, गुरूकुल कांगड़ी(हरिद्वार), रोहतक तथा हिसार की जाट संस्थाएं, हिसार का वर्तमान जाट कॉलेज, सीएवी स्कूल आदि तो पूर्णत: उन्हीं द्वारा बनवाए गए। #आजादी की लड़ाई लड रहे लगभग सभी बड़े नेताओं को इन्होंने मुक्त हाथों से दान दिया।
#महात्मागांधी से लेकर पंडित मोतीलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, राजगोपालाचार्य, कृपलानी, जितेंद्र मोहन सैन गुप्ता तथा श्रीमती नेली सेन गुप्ता सहित तमाम आजादी की जंग लडने वाले नेताओं को सेठ छाजूराम ने दिल खोलकर दान दिया। इस विषय में उन्होंने कभी भी अंग्रेजी सरकार के नाराज होने की परवाह नहीं की …..!
#एक बार #लालालाजपतराय को कलकत्ता में पैसे की जरूरत पड़ी तो उन्होंने 200 रूपए की मांग सेठ चौधरी छाजूराम से की तो उन्होंने 200 रूपए की बजाय 2000 रूपए उदारतापूर्वक भेज दिए। सेठ छाजूराम ने ही सुभाष चन्द्र बोस को जर्मनी जाने के लिए उन्हें खर्च दिया था। उन्होंने उस समय नेताजी को 5000 रुपये आजादी के संग्राम में लड़ने के लिए दिए थे।जिसका उपयोग नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी और जापान जाने के लिए उस धन का किया था।
#असहयोग और स्वदेशी आंदोलन के लिए उन्होंने 15000 रुपये दान दिए। कलकत्ता और #पंजाब के अकाल पीडितों को सेठ जी ने दिल खोलकर पशुओं के चारे व इंसानों के अनाज के लिए योगदान देकर अनेक जानें बचाईं। सेठ चौधरी छाजूराम की दान सूची इतनी बड़ी है कि उसे एक लेख में पूरा लिख पाना संभव नहीं है।
#वे एक महान देशभक्त थे। जब 17 दिसंबर, 1928 को भगतसिंह ने अंग्रेज अधिकारी सांडर्स की गोली मारकर हत्या की तो वे दुर्गा भाभी व उनके पुत्र को साथ लेकर पुलिस की आंखों में धूल झोंकते हुए रेलगाड़ी द्वारा लाहौर से कलकत्ता पहुंचे और कलकत्ता के रेलवे स्टेशन से सीधे सेठ छाजूराम की कोठी पर पहुंचे, जहां सेठ साहब की धर्मपत्नी व
ने उनका स्वागत किया और एक सप्ताह तक अपने हाथ से बना हुआ खाना खिलाया। #अमरशहीदभगतसिंह लगभग अढ़ाई माह तक उनकी कोठी की ऊपरी मंजिल पर रहे। उस वक्त इतनी हिम्मत और जोखिम तो सिर्फ एक सच्चा देशभक्त ही उठा सकता था ….!
#आज उनकी #जन्म_जयंती है



