मराठा काल के पुनर्निर्मित शिव मंदिर की हुई प्राण-प्रतिष्ठा


गोहाना :-15 जनवरी : 1761 में 264 साल पहले पानीपत की तीसरी लड़ाई के समय मराठा सरदारों ने अपनी पूजा-अर्चना के लिए शहर में जिस शिवालय की स्थापना की थी, उसके पुनर्निर्मित शिव मंदिर की 5 दिन से जारी प्राण-प्रतिष्ठा की प्रक्रिया बुधवार को पूर्ण हो गई । मुख्यातिथि के रूप में पहुंचे सोनीपत संसदीय क्षेत्र के सांसद और हरिद्वार के थानाराम आश्रम के संचालक सतपाल ब्रह्मचारी ने अपनी सांसद निधि से मंदिर के लिए 21 लाख रुपए मंजूर करने की घोषणा की।
सनातन धर्म मंदिर शिवाला मस्तनाथ ऐतिहासिक और गोहाना का सबसे पुराना मंदिर है। इस मंदिर के पुनर्निर्माण के यज्ञ में सबसे बड़ी आहुति गोहाना नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन सुनील मेहता ने डाली। उनके आर्थिक सहयोग के आभार स्वरूप मंदिर प्रबंधक समिति ने उन्हें प्राण प्रतिष्ठा समारोह का मुख्य यजमान बनाया। मेहता ने इस धार्मिक दायित्व का निर्वाह
अपनी पत्नी और गोहाना नगर परिषद की पूर्व चेयरपर्सन नीलम मेहता, वर्ल्ड बैंक में उच्चाधिकारी अपने बेटे आकाश मेहता, बेटी डॉ. सोफिया मेहता, दामाद एडवोकेट गौतम मेहता और दोहते अभिराज मेहता के संग पूर्ण किया। 11 जनवरी से प्रारंभ पूजा के पांचों दिन पूरा मेहता परिवार सुबह-शाम पूरा समय देता रहा।
बुधवार को प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की पूर्णाहुति उत्सव में सोनीपत संसदीय क्षेत्र के सांसद और हरिद्वार के थानाराम आश्रम के संचालक सतपाल ब्रह्मचारी बतौर मुख्यातिथि के रूप में पहुंचे। उन्हीं के आश्रम से पं. ललित कोठारी प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के यज्ञ रहे। सम्पूर्ण ब्राह्मण दल उनके साथ हरिद्वार से आया। अध्यक्षता मंदिर के अध्यक्ष प्रवीण गोयल ने की। नवनिर्मित मंदिर में शिव परिवार के साथ राम दरबार और संतोषी माता की भी नई प्रतिमाएं प्रतिष्ठित की गई। कार्यक्रम का संयोजन करने वाली मंदिर की टीम में ओ.डी. शर्मा, विनोद अग्रवाल, वीरेंद्र जैन, अशोक जैन, डॉ. कपूर सिंह नरवाल, गोविंद गोयल, राम निवास सैनी और भोलाराम वर्मा थे।
इस अवसर पर जो प्रतिष्ठित नागरिक पहुंचे, उनमें मुख्य रूप से रामधन भारतीय, जय नारायण गुप्ता, वेद प्रकाश जैन, हरीश परुथी, नरेंद्र गुप्ता, गुलशन बजाज, विनोद जैन, रामनिवास गुप्ता, राम लाल सिंगला, श्याम सुंदर मिगलानी, इंद्र सिंह सहरावत, विनोद सहरावत, बलजीत दांगी, राज कुमार शर्मा, सुरेश गिरधर, संजय जैन, विकास जैन, सुशील बंसल आदि रहे।



