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भारत के महान देशभक्त एवं क्रांतिकारी सन्यासी थे स्वामी भीष्म जी महाराज : आजाद डांगी

गोहाना : 8 जनवरी :  हुकम चंद मंडी गुड्डा रोड गोहाना स्थित आर्य समाज मंदिर में स्वामी भीष्म जी महाराज की 41 वी पुण्यतिथि मनाई गई | सर्वप्रथम हवन यज्ञ किया गया जिसमें पूर्णाहुति आजाद हिंद देशभक्त मोर्चा के मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने देकर कहा स्वामी भीष्म जी महाराज महान देशभक्त एवं क्रांतिकारी सन्यासी थे | उन्होंने पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया था | उनका जन्म 7 मार्च 1859 को कुरुक्षेत्र जिला के तेवड़ा गांव के सामान्य विश्वकर्मा पांचाल परिवार में हुआ | 1919 से 1934 तक स्वामी जी उत्तर प्रदेश स्थित करेहड़ा आश्रम में रहे | करेहड़ा आश्रम वीर भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाक उल्ला खान, लाल बहादुर शास्त्री, रामचंद्र विकल़, चौधरी चरण सिंह आदि क्रांतिकारियों का अड्डा था | जहां ब्रिटिश सरकार को उखाड़ फेंकने की योजना बनाई जाती थी | पुण्यतिथि आयोजन की अध्यक्षता विश्वकर्मा पांचाल कल्याण सभा के पूर्व अध्यक्ष कर्मवीर पांचाल ने की तथा उन्होंने कहा स्वामी भीष्म ने 96 वर्ष तक वैदिक धर्म का प्रचार किया उन्होंने ढाई सौ पुस्तके गद्य व पद में लिखकर धार्मिक राष्ट्रीय तथा सामाजिक चेतना जगाई | देश के प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, चौधरी चरण सिंह व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने उन्हें सम्मानित किया 8 जनवरी 1984 को 125 वर्ष की आयु में उन्होंने लंबा ओम का उच्चारण करके शरीर त्याग दिया इस मौके पर यज्ञ के पुरोहित पंडित विजेंद्र आर्य, मास्टर अजीत आर्य, सतबीर पोडिया, अशोक सरोहा, सत्यनारायण आर्य, राजदेव आर्य राजेंद्र पांचाल पंडित कृष्ण आर्य, मास्टर परमवीर आर्य, ओम प्रकाश आर्य, सुशील पांचाल तथा विक्रम पांचाल आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे |

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