शहीद खुदीराम बोस के 116वें बलिदान दिवस पर आजाद हिन्द देश भक्त मोर्चे ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की
18 साल की उम्र में वतन के लिए मर मिटे थे खुदीराम : वर्मा
गोहाना :-11 अगस्त : 11 अगस्त 1908 को जिस समय खुदी राम बोस को शूली पर टांगा गया था, उस वक्त उनकी आयु केवल 18 साल की थी। उन्हें सबसे छोटी उम्र में वतन पर मर मिटने का सौभाग्य हासिल हुआ ।
यह टिप्पणी रविवार को आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के शहरी अध्यक्ष सुभाष वर्मा ने की। वह शहीद खुदीराम बोस के 116वें बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। यह कार्यक्रम पुराने बस स्टैंड पर स्थित शहीद स्मारक पर हुआ। अध्यक्षता मोर्चे के निदेशक डॉ. सुरेश सेतिया ने की। मार्गदर्शन मोर्चे के मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने किया ।
डॉ. सुरेश सेतिया ने कहा कि ब्रिटिश शासन ने जब खुदीराम बोस को अपने खिलाफ पर्चे बांटने के लिए गिरफ्तार किया, तब वह नाबालिग थे और उनकी उम्र 15 साल की ही थी |आजाद सिंह दांगी ने कहा कि खुदीराम बोस ने 30 अप्रैल 1908 को किंग्सफोर्ड की घोड़ा गाड़ी पर हमला किया था। इस अवसर पर पूर्व नगर पार्षद रतन सिंह वर्मा के साथ सतबीर पौडिया, रमेश मेहता, हरभगवान चोपड़ा, जगदीश चिंदा, कश्मीरी लाल बावा, सुरेश कश्यप, जगदीश पूनिया, सुभाष शर्मा, उधम सिंह आदि भी मौजूद रहे।


