पुरानी अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में प्रवचन करते हुए जैन संत जय मुनि ने कहा-रामायण से सीखें परिवार को एकजुट रखना
उन्होंने कहा कि जहां दो बर्तन होते हैं, वे बजते ही हैं, परंतु उनकी आवाज उनको उठाते या रखते समय ही आती है। आदमी का स्वभाव इसके ऐन उलट है। वह झगड़ा तब करता है जब वह खाली होता है ।
गोहाना :-9 अगस्त : आप अगर अपने परिवार को एकजुट रखना चाहते हैं, आप इसे रामायण से सीख सकते हैं। घर-घर में पाठ रामायण का होता है, महाभारत का नहीं। शुक्रवार को यह संदेश पुरानी अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में प्रवचन करते हुए जैन संत जय मुनि ने दिया । उन्होंने कहा कि जिस घर में बड़ों का सम्मान होता है, छोटों से प्यार किया जाता है, वहां तनाव टिक ही नहीं सकता ।
जय मुनि इस बार गोहाना में चातुर्मास कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि परिवार और समाज को एक रखने के लिए प्रेम
आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जहां दो बर्तन होते हैं, वे बजते ही हैं, परंतु उनकी आवाज उनको उठाते या रखते समय ही आती है। आदमी का स्वभाव इसके ऐन उलट है। वह झगड़ा तब करता है जब वह खाली होता है ।
जैन संत ने कहा कि राम ने राजपाट को त्याग कर परिवार की एकता और अखंडता को बचा लिया,लेकिन महाभारत के पात्र कौरव ऐसे हैं कि आज कोई उनका नाम भी लेना पसंद नहीं करता । इस की वजह है कब्जा करने की उनकी नीयत । जय मुनि ने कहा कि यह गर्व नहीं, शर्म का विषय है कि भारत में वृद्धाश्रम लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आप अपनी सफलता का श्रेय दूसरों को दें तथा नाकामयाबी के लिए खुद को जिम्मेदार मानें, तनाव कभी आप के आसपास भी नहीं फटकेगा।



