5 साल की अल्पायु में ही गुरु बन गए थे हरकिशन : डॉ. सेतिया, पंचम पातशाही का आठ साल का होने से पहले चेचक से हो गया था निधन
गोहाना :-29 जुलाई : सिख धर्म के अष्टम पातशाही गुरु हरकिशन उस समय केवल पांच साल के थे जब अपने पिता गुरु हर राय के उत्तराधिकारी के रूप में वह गुरु बन गए थे। 29 जुलाई 1656 को उनका जन्म लाहौर सूबे के कीरतपुर साहिब में हुआ था । जीवन के आठवें वर्ष में प्रवेश से पहले ही चेचक से संक्रमित होने पर 1664 में उनका निधन हो गया और वह ब्रह्मलीन हो गए।
सोमवार को यह जानकारी पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र में स्थित मुख्य गुरुद्वारे में श्री गुरु सिंह सभा के तत्वावधान में हुए प्रकाशोत्सव कार्यक्रम में इस सभा के महासचिव डॉ. सुरेश सेतिया ने दी । सानिध्य सभा के अध्यक्ष सरदार काबुल सिंह का रहा । शबद कीर्तन गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी भाई रणजीत सिंह ने किया तथा संयोजन सभा के उपाध्यक्ष जगदीश चिंदा ने की।
इस अवसर पर आजाद सिंह दांगी, रमेश मेहता, कश्मीरी लाल बावा, सुभाष शर्मा, अमनप्रीत कौर, सतीश सैनी, अनुज सिंह, आर्यन सिंह, मीना नागपाल आदि भी मौजूद रहे।


