बी.पी.एस. महिला विश्वविद्यालय में पढो बेटियो – बढ़ो बेटियो के थीम पर कवि सम्मलेन का आयोजन
“बेटी ब्यूटीफुल, वंडरफुल... इन्हें ना रोको, इन्हें बचा लो"

गोहाना :-22 मार्च : बी. पी. एस. महिला विश्वविद्यालय में पढ़ो बेटियो- बढ़ो बेटियों थीम पर शुक्रवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। छात्र कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वी.सी. प्रो सुदेश ने की।
कवयित्री कविता तिवारी ने सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। कवि सुदीप भोला के ताजा राजनीतिक घटनाक्रम पर पैरोडी “टूटा गठबंधन जैसे लिट्टी का चोखे से” पर श्रोताओं ने ठहाके लगाए। रामलला प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देश-विदेश में उमड़े अपार उत्साह का वर्णन उन्होंने “सिया संग राम पधारे हैं” पंक्तियों के साथ किया। बेटियों को ईश्वर की अनमोल कृति की संज्ञा देते हुए सुदीप भोला ने “बेटी ब्यूटीफुल, वंडरफुल… इन्हें ना रोको, इन्हें बचा लो” पंक्तियां सुनाई। उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल और इसके दुष्प्रभावों पर तीखा कटाक्ष करते हुए “पढ़ती नहीं पढ़ाती हैं, दिनभर रील बनाती है” कविता प्रस्तुत की।
कवयित्री कविता तिवारी ने अपनी प्रसिद्ध रचना “जब तक ये सूरज चंदा चमके, तब तक ये हिंदुस्तान रहे” का पाठ किया तो पूरे सभागार में देश प्रेम की भावना उमड़ उठी। अपने गीत की अत्यंत मार्मिक पंक्तियों के साथ उन्होंने कन्या भ्रूण की अपील “एक बार सुन लो पुकार ये हमारी, कोख में न मारो बाबुल बेटी हूं तुम्हारी” सुनाई ।
कवि उपेंद्र पांडे ने “भर पिचकारी मुरलीधर खेले जो होरी, गोपियों के संग बरसाने में चोरी-चोरी” पंक्तियों के साथ सभी को होली की काव्यात्मक शुभकामनाएं दी। उन्होंने देश प्रेम से भरपूर पंक्तियां “हम देश नहीं झुकने देंगे, यह भारतवर्ष हमारा है” सुनाई तो सभागार तालियों से गूंज उठा। बेटियों को समर्पित उनकी रचना “घर पावन हो जाता है, जब बेटी पैदा होती है, पिता का मान बढ़ाकर मां को सम्मान दिलाती है, बेटी होकर कभी-कभी बेटे का फर्ज निभाती है” ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। प्रारंभ में विशेष उद्बोधन करते हुए कर्नल मूल भार्गव ने कहा कि समाज की दशा-दिशा निर्धारित करने में महिलाओं की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों का उपयोग सावधानी से करने का आह्वान किया।



