गोहाना के आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे ने आचार्य रामानंद की जयंती पर किया नमन
मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के संत थे रामानंद : डॉ. समुद्र दास
गोहाना :-2 फरवरी : आचार्य रामानंद मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के संत थे। शुक्रवार को यह टिप्पणी अध्यात्म में पी.एच.डी. डॉ. समुद्र दास ने की । वह शहर में सेक्टर 7 स्थित भगवान परशुराम आश्रम में आचार्य रामानंद की जयंती पर उन्हें नमन कर रहे थे।
आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता भगवान परशुराम आश्रम के अध्यक्ष सुभाष शर्मा ने की तथा संचालन मोर्चे के मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने किया। मुख्य वक्ता डॉ. समुद्र दास ने कहा कि रामानंद आचार्य ने अल्पकाल में ही सब शास्त्रों, वेदों और पुराणों का अध्ययन कर लिया था। स्वामी राघवानंद से राम तारक मंत्र की दीक्षा ग्रहण कर रामानंद आचार्य बने।
सुभाष शर्मा ने कहा कि परिवार और गुरुजनों के दबाव के बावजूद रामानंद ने गृहस्थ आश्रम स्वीकार नहीं किया। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम को अपना आदर्श स्वीकार कर सरल भक्ति मार्ग का निर्देशन किया।
इस अवसर पर धर्मबीर शर्मा, कृष्ण दत्त, दरियाव सिंह, रमेश मेहता, राम गोपाल पौडिया, वेद पाल, वीरपाल, ब्रह्मदत्त राठी, मुखत्यार सिंह दांगी, श्रीभगवान कल्सन, रमेश शर्मा, जगदीश पटवा, राहुल शर्मा आदि भी मौजूद रहे।


