भगवनश्री रामप्रसाद जी महाराज ने हुंकार भरी थी कि राम मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो क्या मक्का-मदीना में बनेगा ; विधाता को भाग्य बदलने को बाध्य कर देते हैं गच्छाधिपति के आशीर्वचन
गोहाना :-19 जनवरी : विधाता भी तब अपने लिखे भाग्य को बदलने के लिए बाध्य हो जाते हैं जब गच्छाधिपति प्रकाश चंद जी महाराज के श्रीमुख से किसी श्रद्धालु के लिए आशीर्वचन निकलते हैं। यह टिप्पणी शेर-ए-हिंद सुंदर मुनि ने की। वह वजीरपुरा गांव में स्थित टी. पी. एस. पब्लिक स्कूल में जुटे जैन श्रद्धालुओं के सैलाब को संबोधित कर रहे थे। शेर-ए-हिंद ने 22 जनवरी को राजनीति, वर्ण-जाति के प्रत्येक बंधन से ऊपर उठ कर सब स्थानों पर श्री राम जन्म भूमि प्राण प्रतिष्ठा उत्सव मनाने का आह्वान भी खुले मंच से किया।
यह आयोजन गच्छाधिपति की दीक्षा का 80वां वर्ष प्रारंभ होने के उपलक्ष्य में हुआ। कार्यक्रम में जैन श्रद्धालुओं को कृतकृत्य करने के लिए स्वयं गच्छाधिपति प्रकाश चंद जी महाराज मंचासीन थे। उनके संग शेर-ए-हिंद सुंदर मुनि, सुशील मुनि और संयति मुनि भी विराजमान रहे। 95 साल के गच्छाधिपति का आशीर्वाद ग्रहण करने के लिए देश के कोने-कोने के साथ विभिन्न देशों से जैन श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। जैन समाज ने गच्छाधिपति की दीक्षा के 79 वर्ष पूर्ण होने तथा 80वां वर्ष प्रारंभ होने को मंगल उत्तम श्रद्धा संयम दिवस के रूप में मनाया। शेर-ए-हिंद सुंदर मुनि जी ने कहा कि जिस पर गच्छाधिपति की कृपा दृष्टि हो जाए, उस बांझ कोख को पुत्र, निर्धन को धन और बीमार को सेहत मिलती है। उन्होंने कहा कि जैसे राम जन्म से राम नवमी और महावीर के जन्म से महावीर जयंती पुनीत बन गए, उसी तरह से संयमी महापुरुषों की जयंतियों और पुण्य तिथियों के दिन-तिथि पर्व बन जाते हैं। उन्होंने पाखंड और आडंबर से दूर रहने का संदेश दिया तथा कहा कि जो गुण ग्रहण करता हैं, वहीं गुरु का शिष्य कहलाने का अधिकारी है।
शेर-ए-हिंद ने स्मरण करवाया कि 15 जुलाई 1981 को उत्तर प्रदेश के कांधला शहर में भगवनश्री रामप्रसाद जी महाराज ने हुंकार भरी थी कि राम मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो क्या मक्का-मदीना में बनेगा। सनातन धर्म के अनुयायियों के साथ जैन श्रद्धालुओं की यह दिल की पुकार थी कि राम मंदिर अयोध्या में ही बने और भव्य बने। आर्य वज्र स्वाध्याय संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम कुमार जैन ने अध्यक्षता की जब कि संचालन संघ की राष्ट्रीय महासचिव प्रतिभा जैन ने किया।


