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गोहाना के श्मशानघाट में बन रही है भगवान शिव की 55 फुट ऊंची, 25 फुट चौड़ी प्रतिमा

लाखों रुपए की सम्पूर्ण लागत स्वयं वहन करेंगे हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक, रोहतक में भी बनवा चुके हैं 25 फुट और 35 फुट ऊंची दो प्रतिमाएं

 

गोहाना :-4 जनवरी : आप अब जब भी कभी गोहाना आएंगे, बस स्टैंड पर बस से उतरते या चढ़ते अथवा अपने स्वयं के वाहन से गुजरते हुए आप की निगाह भगवान शंकर की दिव्य प्रतिमा पर पड़े बिना नहीं रहेगी।

55 फुट ऊंची और 25 फुट चौड़ी इस विराट प्रतिमा लाखों रुपए के बड़े व्यय से तैयार हो रही है जिसे हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ.एस.एस. मुदगिल स्वयं वहन करेंगे। डॉ. मुदगिल रोहतक में दिल्ली बाईपास पर 25 फुट और ब्राह्मणवास गांव के आयुर्वेदिक कॉलेज में 35 फुट ऊंची समान प्रतिमाएं पहले ही बनवा चुके हैं।

गोहाना में जो प्रतिमा बन रही है, उसका स्थल रोहतक रोड पर बस स्टैंड के निकट स्थित श्मशानघाट है। भूमि पूजन के साथ डॉ. एस.एस. मुदगिल ने निर्माण कार्य शुभारंभ 8 महीने पहले 8 मई 2023 को किया था। प्रयास अगले महीने शिवरात्रि के दिन इस प्रतिमा के लोकार्पण का है।

अत्यन्त विनम्रता से डॉ. एस. एस. मुदगिल कहते हैं कि मैं कौन होता हूं, कुछ करने या करवाने वाला। यह प्रतिमा स्वयं भोले बाबा की प्रेरणा से बन रही है। वह रोहतक में घर से निकले तो कहीं ओर जाने के लिए थे, जाने मन में क्या आया, पहुंच गए गोहाना । श्मशानघाट के प्रबंधन के नुमाइंदों को मौके पर बुलाया, उनसे जमीन की याचना की तथा गिनती के दिनों में प्रारंभ हो गया निर्माण ।

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डॉ. एस. एस. मुदगिल 2011 तक गोहाना में बतौर चिकित्सक प्रैक्टिस करते रहे। उन्होंने 44 साल लंबे समय तक रोगियों की सेवा की। वह हुड्डा सरकार के शासनकाल में हरियाणा साहित्य अकादमी के चेयरमैन रहे। पहली प्रतिमा डॉ. एस. एस. मुदगिल ने 2003 में रोहतक में दिल्ली बाईपास पर बनवाई थी। वह प्रतिमा 25 फुट ऊंची थी। दूसरी प्रतिमा 2007 में ब्राह्मणवास गांव के गौड़ ब्राह्मण आयुर्वेदिक कॉलेज में बनवाई। यह प्रतिमा 35 फुट ऊंची थी।

तीसरी प्रतिमा 17 साल बाद अपनी कर्मभूमि गोहाना में बनवा रहे हैं। तीनों प्रतिमाओं का निर्माण मौके पर हुआ। ये प्रतिमाएं उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के दो सगे भाइयों-विजय वर्मा और हेमराज वर्मा के हाथों से सृजित हुई। कमाल तो यह है कि प्रतिमाएं किसी मशीन नहीं, केवल हाथों के प्रयोग से बनी। प्रतिमाओं में पत्थर का प्रयोग नहीं हुआ। ये प्रतिमाएं सरिया, सीमेंट, रोड़ी और डस्ट से तैयार की गई। इन को मिक्स करने के लिए जरूर मिक्सर मशीन का इस्तेमाल हुआ।

गोहाना में 55 फुट ऊंची प्रतिमा का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। केवल पेंट होना बाकी है। इस प्रतिमा का फाउंडेशन 12 फुट जमीन के अंदर और 13 फुट ऊपर है। उससे ऊपर तीस फुट में भगवान शंकर प्रतिष्ठित हैं। अब डॉ. एस.एस. मुदगिल नै श्मशान प्रबंधन से अनुमति मांगी है कि समीप में वह 8 फुट गुणा 8 फुट के छोटे स्थान पर शिव परिवार को स्थापित करना चाहते हैं जिसके दैनिक जलाभिषेक का पानी श्मशानघाट की हरियाली को सींचेगा।

गुरुवार को श्मशानघाट प्रबंधन की टीम के साथ डॉ. एस. एस. मुदगिल ने निर्माण कार्य का अवलोकन किया। इस अवसर पर उनके साथ गुलशन नारंग, महेश तरीका, विजय मग्गो, संजय मेहंदीरत्ता, हरभगवान चोपड़ा, मनोज मेहता, यशदीप मलिक आदि भी मौजूद रहे।

Khabar Abtak

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