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चक्की के पाट क्या बदले, नियति ही बदल गई : डॉ. गजराज कौशिक

गोहाना :- 1 नवम्बर : आटा पीसने वाली चक्की के पाट क्या बदले, हमारी नियति ही बदल गई। यह मार्मिक टिप्पणी आई.एम.ए. की गोहाना इकाई के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. गजराज कौशिक ने की।

उन्होंने कहा कि जब मां हाथ से चक्की पीसती थी, तब ऊपर का पाट् चलता था। उस दौर में खुशियां बहुत होती थी, हर घर ठाठ से विराट चलता था। जब से बिजली की चक्की आई है, उसमें नीचे का पाट चलने लगा है। उससे परिवार बिखर गए, घर बारह बाट हो गए।

डॉ. गजराज कौशिक मंगलवार की रात को हरियाणा दिवस की पूर्व संध्या पर शहर में आयोजित कवि सम्मेलन में संयुक्त परिवारों के विघटन पर विचार व्यक्त कर रहे थे। कवि सम्मेलन के लिए सानिध्य डॉ. कौशिक का रहा।

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इस कवि सम्मेलन में कोई भी मुख्य अतिथि विशिष्ट अतिथि नहीं था। मंच पूरी तरह से आमंत्रित कवियों को समर्पित था। कवि सम्मेलन में काव्य पाठ के लिए दिल्ली पुलिस के ए.सी.पी. राजबीर मलिक भी पहुंचे। मुजफ्फरनगर से वीर रस की कवयित्री खुशबू शर्मा, दिल्ली की शृंगार रस की कवयित्री रजनी अवनि और डॉ. सीमा वत्स, वहीं के हास्य कवि युसूफ भारद्वाज और महेंद्र अजनबी आदि भी पहुंचे।

मंच संचालन वरिष्ठ कवि दीपक सैनी ने किया। उन्होंने अनेक नेताओं की मिमिक्री से श्रोताओं को जम कर गुदगुदाया। स्थानीय प्रतिभाओं में राजीव पाराशर ने भी काव्यपाठ किया।

Khabar Abtak

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