समलैंगिक की भांति समगोत्र विवाह भी हों अवैध घोषित : रामकुमार मित्तल

गोहाना :-25 अक्तूबर : जिस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाहों को अवैध घोषित किया है, उसी तरह से समगोत्र विवाहों को भी गैर-काननी करार दिया जाना चाहिए। बुधवार को यह मांग सोनीपत विहिप के पूर्व जिला अध्यक्ष राम कुमार मित्तल ने की। मित्तल शहर में काठमंडी की पटेल बस्ती स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का समलैंगिक विवाहों पर अपनी मुहर लगाने से इंकार वास्तव में प्रशंसनीय है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने भारत की संस्कृति को तहस- तहस होने से बचा लिया है। समलैंगिक विवाह न केवल अवैध, अपितु अप्राकृतिक और अनैतिक भी हैं। पश्चिम का अंधानुकरण हमारे नैतिक मूल्यों के लिए भारी खतरा बन सकते हैं।
विहिप के पूर्व जिला अध्यक्ष राम कुमार मित्तल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को समलैंगिक विवाहों को ले कर कानून बनाने का निर्देश भी दिया है। उन्होंने कहा कि समाज और देश के हित में केंद्र सरकार को ऐसा नया कानून जल्दी से जल्दी बना कर ऐसे विवाहों को निरुत्साहित करने का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त कर देना चाहिए। राम कुमार मित्तल ने कहा कि समलैंगिक विवाहों की तर्ज पर समगोत्र विवाहों को भी पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए । उन्होंने कहा कि देश की खाप पंचायतें लंबे समय से एक ही गोत्र या एक ही गांव में विवाह का कड़ा विरोध कर रही हैं। अदालत और सरकार को इस विरोध का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए तथा समगोत्र के साथ समगांव के विवाह को रोकने के लिए उसे कानूनी अमलीजामा पहना देना चाहिए। विहिप के पूर्व जिला अध्यक्ष ने कहा कि समगोत्र और समगांव विवाह न केवल अनैतिकता का विस्तार कर रहे हैं अपितु भांति-भांति के गंभीर विवादों को भी जन्म दे रहे हैं। अपनी इज्जत पर आंच आने पर परिजन ऑनर किलिंग तक के लिए मजबूर हो जाते हैं।



