अम्बाला लोकसभा उपचुनाव तो होगा शायद कुमारी शैलजा उपचुनाव लड़ें
हरियाणा में अंबाला सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के सांसद रतनलाल कटारिया के निधन के बाद जहां कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं कि अब सरकार नहीं चाहेगी कि 6 महीने के कार्यकाल के लिए भी उपचुनाव कराया जाए , वह भी उस अवस्था में जब सरकार या चुनाव आयोग को उपचुनाव को टाल देने के अधिकार हो । लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि अंबाला का उपचुनाव टाला नहीं जा रहा है बेशक नए सांसद को काम करने के लिए मुश्किल से छह महीने का वक्त मिलेगा । सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी में ही एक वर्ग ऐसा है जो उपचुनाव कराने के पक्ष में है।
अंबाला लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवारों की बात करें तो हमें यह मानकर चलना चाहिए कि भारतीय जनता पार्टी प्रस्तावित चुनाव में दिवंगत सांसद रतनलाल कटारिया की पत्नी बंतो कटारिया को उम्मीदवार बनाकर इस सहानुभूति को कैश कर जीत हासिल कर प्रतिद्वंदी कांग्रेस पार्टी के लोकप्रियता के दावे की फूंक निकालना चाहती है। जो भाजपा नेता चुनाव कराने के पक्ष में है उन सब का यही ख्याल है कि अंबाला लोकसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी मजबूत स्थिति में है।इसमें कोई संदेह नहीं कि लोकसभा का उपचुनाव भी भारतीय जनता पार्टी में जीत लिया तो उसे इसका लाभ 2024 के लोकसभा के आम चुनाव में सभी 10 सीटों पर मिल सकेगा दूसरी तरफ कोंग्रेस की हार उसे निश्चित तौर पर बैक फुट पर ले जाएगी। यहां यह बात भी गौर करने की है कि अब अंबाला सहित तीन लोक सभा क्षेत्रों में लोकसभा के उपचुनाव होने हैं और इन में केरल की वायनाड सीट भी शामिल है जिसका प्रतिनिधित्व राहुल गांधी करते थे। ऐसे में यह कैसे संभव है कि वायनाड जहां भारतीय जनता पार्टी की गहरी रुचि है मे तो उपचुनाव हो और अंबाला में नहीं हो। इसीलिए अंबाला में उपचुनाव कराई जाने की संभावनाएं ज्यादा हैं। यह भी बता दें कि तीनों उपचुनाव 22 सितंबर 2023 से पहले तक कराए जाने की उम्मीद है।
ऐसा माना जा रहा है कि उपचुनाव में भाजपा को कई लाभ मिल सकते हैं। एक तो उसे सहानुभूति का वोट मिलेगा दूसरे पिछले चुनाव में जहां अब भाजपा के सहयोगी दल जननायक जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर अलग से चुनाव लड़ा था इस बार गठबंधन और तालमेल को देखते हुए जननायक जनता पार्टी इस चुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा करने की बजाय भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी का ही समर्थन करेगी। यदि जेजेपी के हल्के वाइज 5 हजार वोटों की मदद को भी जोड़कर चलें तो भाजपा उम्मीदवार को पचास हजार वोटों का लाभ होता दिखाई देगा। अंबाला लोकसभा क्षेत्र के 9 विधानसभा क्षेत्र में पांच में भारतीय जनता पार्टी के विधायक है इनमें दो मंत्री और एक स्पीकर भी है। भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में होने का लाभ अलग से मिलेगा।
ज्यादातर लोग यह मानकर चल रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी उपचुनाव में दिवंगत सांसद रतनलाल कटारिया की पत्नी बन्तो कटारिया को ही मैदान में उतारेगी परंतु इसके बावजूद कुछ लोग भाजपा के भावी प्रत्याशी के रूप में पूर्व विधायक अनिल धनतोड़ी तथा अंबाला के पूर्व सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय चौधरी सूरत भान के पुत्र के नाम को भी प्रचारित कर रहे हैं।
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोंग्रेस अंबाला से किसी नए उम्मीदवार मैदान में ला सकती है क्योंकि अंबाला से 2004 और 2009 में सांसद रही कुमारी शैलजा कथित तौर पर यह उपचुनाव लड़ने के मूड में नहीं है और पार्टी में उनकी इतनी हैसियत है कि वे चुनाव से हटना चाहेंगी तो उन्हें इसकी इजाजत मिल जाएगी। कुमारी शैलजा ने एक बार लोकसभा का चुनाव सिरसा में भी छोड़ दिया था और एक बार 2014 में अंबाला में भी चुनाव से हट गई थी। पता चला है कि उनकी कोशिश यह है कि नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी पसंद के किसी उम्मीदवार को मैदान में उतारे । उन्हें पता है कि इन परिस्थितियों में पार्टी किसी विधायक को टिकट देकर चुनाव में उतारने की गलती नहीं करेगी। बताते हैं कि कांग्रेस के ही कुछ नेता उम्मीदवार के रूप में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदय भान का नाम आगे करेंगे। लेकिन इस बात के पक्के आसार हैं कि कुमारी शैलजा खुद चुनाव नहीं लड़ेंगी तो वह यह भी नहीं चाहेगी कि उनका समर्थक कोई और नेता उपचुनाव लड़े। अंबाला क्षेत्र में कुछ लोग एक सेवानिवृत्त अधिकारी का नाम संभावित उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करने लगे हैं लेकिन दल बदल के लिए विख्यात इस अधिकारी की कोंग्रेस में दूसरी बार एंट्री कुमारी शैलजा के मध्यम से हुई बताई गई है । दल बदल के लिए बदनाम यह सेवानिवृत्त अधिकारी पहले बहुजन समाज पार्टी में था , फिर कांग्रेस में आ गया फिर कांग्रेस छोड भाजपा में चला गया फिर भाजपा छोड़ आदमी पार्टी में चला गया कुछ दिन पहले आदमी पार्टी भी छोड़ दी अब दोबारा फिर कोंग्रेस में आ गया। मजे की बात तो यह है कि नेता बनने की कोशिश में उन्होंने दल ही नहीं हल्के भी कई बदले हैं।पहले लोकसभा का चुनाव अंबाला से लड़ा ,बुरी तरह से हार गए फिर पार्टी छोड़कर कॉन्ग्रेस की टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा मतलब हल्का बदला फिर हार गए। उसके बाद भाजपा में चले गए अंबाला से बाहर दूसरी जगह से विधानसभा का टिकट मांगने लगे टिकट नहीं मिली तो भाजपा भी छोड़ दी फिर आम आदमी पार्टी में आ गए वहां से एक और नई विधानसभा क्षेत्र पर नजर रखते हुए विधायक बनने का सपना दे रहे थे तो अचानक न जाने क्या हुआ कि आम आदमी पार्टी भी छोड़ गए अब दूसरी बार कांग्रेस में गए हैं ।ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि उनकी उम्मीदवारी को कितनी गंभीरता से लिया जा सकता है ।
ऐसे में एक नई चर्चा यह चल पड़ी है कि कोंग्रेस आला कमान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदय भान जो किसी सदन के सदस्य नहीं है को अंबाला से चुनाव लड़ने के लिए कहा जा सकता है। पार्टी में नेताओं का एक गुट इस प्रस्ताव की वकालत करता नजर आ सकता है । इस फैसले को भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उदय भान किस तरह से लेंगे यह वक्त बताएगा। एक बात और भी है कि यदि भूपेंद्र सिंह हुड्डा के उम्मीदवार ने अंबाला का भावी संभावित उपचुनाव लड़ा तो फिर आम आदमी पार्टी डॉक्टर अशोक तंवर को एक बड़ी रणनीति के तहत मैदान में उतार सकती है। बता दे कि पिछले विधानसभा के चुनाव में अंबाला लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाले तीन विधानसभा क्षेत्रों से तीन विभिन्न उम्मीदवारों को डेढ लाख से ज्यादा वोट पड़े थे जो अब आम आदमी पार्टी में हैं। इनमें जगाधरी से चुनाव लड़े आदर्श पाल को 50,000 से ज्यादा अंबाला कैंट से चुनाव लड़ी चित्रा संवारा को भी लगभग 50000 और अंबाला शहर से चुनाव लड़े उनके पिता चौधरी निर्मल सिंह को 60 हजार से भी ज्यादा मत मिले थे यह अलग बात है कि इनमें से कोई भी चुनाव जीत नहीं पाया था परंतु अब यह तीनों आम आदमी पार्टी में हैं ऐसे में पार्टी के नेता यह मानकर चल सकते हैं कि लोकसभा चुनाव में उनके उम्मीदवार को ढाई लाख से ज्यादा वोट निश्चित तौर पर पड़ सकते हैं ।इससे पार्टी को जो बूस्ट मिलेगा उसका लाभ निश्चित तौर पर पूरे प्रदेश में मिलता नजर आएगा।


