देवीलाल परिवार राजस्थान विधान सभा चुनाव में सत्ता की चाबी के लिए करेगा जोर अजमाईश
अभय चौटाला राजस्थान में हनुमान बेनीवाल का समर्थन कर सकते है
हरियाणा बेशक छोटा सा प्रदेश है परंतु यहां स्वर्गीय चौधरी देवी लाल का परिवार ऐसा राजनीतिक घराना है जिसने समय-समय पर हरियाणा से बाहर चुनाव लड़ने जीतने और दूसरे दलों की सरकार तक बनाने में अहम भूमिका निभाई है। स्वर्गीय चौधरी देवी लाल ने चुनाव लड़ने के मामले में कई कीर्तिमान स्थापित किए ।उन्होंने हरियाणा के अलावा राजस्थान से चुनाव लड़ा ,पंजाब से लड़ा ।वे राजस्थान के सीकर से सांसद रहे। हरियाणा की बात करें तो उन्होंने सोनीपत से लोकसभा के तीन चुनाव लड़े ।यहां से सांसद रहे ।रोहतक लोकसभा से तीन चुनाव लड़े एक बार सांसद बने ।
उन्होंने 1972 में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी भजनलाल के खिलाफ आदमपुर से और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी बंसीलाल के खिलाफ दो सीटों पर एक साथ चुनाव लड़ा। उन्होंने भट्टू कला, फतेहाबाद ,महम से विधानसभा के चुनाव लड़े । वे फतेहाबाद, भट्टू कलां और महम से विधायक रहे । परिवार की बात करें तो पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने ऐलनाबाद , रोड़ी ,नरवाना ,उचाना ,महम और दड़बा कलां से चुनाव लड़े ।उन्होंने राज्य से बाहर अपने जनाधार को साबित करने के लिए 2003 में उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ा। दिल्ली से चुनाव लड़ा ।
दिल्ली में भरत सिंह उनका विधायक भी बना। इसके अलावा 1993 में जब चौधरी देवी लाल और ओम प्रकाश चौटाला जनता दल चलाते थे तो उन्होंने राजस्थान में विधानसभा चुनाव में कई जगह अपने उम्मीदवार खड़े किए जिनमें से 6 विधायक बने और यह आधा दर्जन विधायक उस समय राजस्थान की भैरों सिंह शेखावत सरकार के लिए निर्णायक साबित हुए थे। उन्हें मतलब भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने के लिए जितने विधायकों की जरूरत थी उसकी पूर्ति जनता दल से हुई थी। राजनीतिक उपलब्धि की बात करें तो उत्तर प्रदेश चौधरी ओमप्रकाश चौटाला के लिए लाभकारी साबित नहीं हुआ लेकिन वहां संगठन कर खड़ा करने और चुनाव लड़ने का साहस दिखाकर श्री चौटाला ने यह साबित करने की चेष्टा जरूर की कि वे केवल हरियाणा के नहीं बल्कि किसानों के नेता भी हैं और उनके राज्य से बाहर भी जानदार है।
इंडियन नेशनल लोकदल में विभाजन के बाद बनी जननायक जनता पार्टी के नेताओं ने भी हरियाणा से बाहर चुनाव लड़ने और अपना जनाधार बनाने तलाशने की कोशिश जारी रखी है। पार्टी ने भाजपा के साथ मिलकर दिल्ली में चुनाव लड़ा और अब राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ने की उनकी तैयारी साफ नजर आ रही है। जननायक जनता पार्टी अकेले चुनाव लड़े या भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करके यह तो समय बताएगा लेकिन उनकी तैयारियां चुनाव लड़ने की है इसमें कोई संदेह नहीं।

पार्टी के लिए किसी भी मोर्चे पर लड़ने को तैयार दिग्विजय चौटाला, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से पहले है राजनीति में सक्रिय।
जननायक जनता पार्टी के नेता इस कोशिश में हो सकते हैं कि दिसंबर 2023 में राजस्थान विधानसभा के चुनाव में भी उनके कुछ विधायक बने तो उन्हें इसका लाभ डेढ़ साल बाद हरियाणा में होने वाले चुनाव में भी मिल सकता है।
यदि चौधरी देवी लाल के परिवार के राजस्थान में लड़े चुनाव की चर्चा करें तो 1989 में अजय सिंह चौटाला दातारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनकर राजस्थान विधानसभा पहुंचे थे। उसके बाद 1993 में जनता दल के जो छह विधायक बने उनमें डॉक्टर अजय सिंह चौटाला नोहर, नासारु लक्ष्मणगढ़ बृजराज सिंह बयाना फतेह सिंह कुशलगढ़ दालीचंद दानपुर पुंज लाल बागीदौरा शामिल थे । इनमें फतेह सिंह दालीचंद और पुंज लाल अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों से जीत कर आए थे।
यहां यह बताना जरूरी है कि 1993 के चुनाव में 199 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के 96 कांग्रेस के 76 कम्युनिस्ट पार्टी का एक जनता दल के 6 और 21 निर्दलीय विधायक जीत कर आए थे लेकिन भाजपा ने निर्दलीयों को छोड़कर जनता दल के 6 विधायकों को साथ लेकर सरकार बनाई और भैरों सिंह शेखावत मुख्यमंत्री बने।
पिछले काफी समय से जेजेपी के नेता राजस्थान में राजनीतिक और सामाजिक तौर पर सक्रिय नजर आ रहे हैं जेजेपी के छात्र संगठन इनसो ने राजस्थान में अपनी इकाई खड़ी कर ली है। राजस्थान में जाटों के सिरमौर तेजाजी की जन्म स्थली खरनाल में उनके नाम से मंदिर का निर्माण किया जा रहा है जिसमें अजय सिंह चौटाला ने 6 करोड रूपए दान के रूप में दिए हैं। यही उन्होंने 17 किलो की सोने की ईंट भी दान की थी जो बाद में नकली पाई गई परंतु इसकी नगद पैसे देकर पूर्ति कर दी गई है। इसी गांव में उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पिछले दिनों एक लाइब्रेरी का उद्घाटन करके आए ।
जेजेपी के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे राजस्थान में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है ।उन्हें भरोसा है कि भारतीय जनता पार्टी जननायक जनता पार्टी को साथ लेकर चुनाव लड़ेगी ।जेजेपी ने 28 विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है जहां उनकी चुनाव लड़ने की रुचि है ।अब यह समय बताएगा कि गठबंधन होगा या वे अकेले लड़ेंगे और कितनी सीटों पर लड़ेगे।
यहां एक बात और नजर आ रही है वह यह कि इंडियन नेशनल लोकदल की भी राजस्थान में रुचि है परंतु पार्टी जेजेपी की तरह चुनाव लड़ने की योजना नहीं बना रही है ।पार्टी के विधायक और नेता अभय सिंह चौटाला राजस्थान में अपनी पार्टी के उम्मीदवार खड़े करने की बजाय नागौर के सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संस्थापक हनुमान बेनीवाल को सपोर्ट करते नजर आ सकते हैं।



