खानपुर कलां स्थित बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में इन दिनों मरीजों व उनके परिजनों के लिए मूलभूत सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। हालात यह है कि अस्पताल में मरीजों के बैठने की उचित व्यवस्था भी नहीं है। मरीजों को टूटे बेंचों पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके बावजूद महिला मेडिकल कॉलेज नए बेंच रखवाने की बजाय टूटे बेंचों के नीचे ईंटें रखवाकर काम चला रहा है। इससे मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत 500 बेड का अस्पताल संचालित है। इसके चलते अस्पताल में मरीजों के साथ उनके परिजन भी सहयोग के लिए अस्पताल आते हैं। इसके बावजूद यहां उनके बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। हालात यह हैं कि मरीजों को या तो खड़े होकर अपना नंबर आने का इंतजार करना पड़ता है या फिर टूटे हुए बेंचों पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ओपीडी से लेकर अन्य विभागों में काफी बेंच टूटे पड़े हैं। इन बेंचों को वहां से हटाया भी नहीं जा रहा है, बल्कि उनके नीचे ईंटें रखकर स्पॉट दी गई है।
ऐसे में मरीज भी प्रशासन से इनका समाधान करने की मांग कर रहे हैं। मरीजों का कहना है कि ओपीडी से लेकर अन्य विभागों में जांच कराने के लिए कई घंटे लग जाते हैं। ऐसे में मरीज अधिक देर तक खड़े नहीं रह सकते। जिन बेंचों पर ईंटें रखी हैं, उन पर अधिक मरीज बैठने से गिरने का डर बना रहता है। इस कारण या तो वे खड़े होकर इंतजार करते हैं या फर्श पर बैठते हैं।
मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में हर रोज 2300 से 2500 मरीजों की ओपीडी होती है। इस अस्पताल में आठ विभागों की ओपीडी, वार्डों के अलावा अल्ट्रासाउंड, एक्सरे तक लेकर आपातकालीन विभाग की सुविधा है। मरीजों के भर्ती होने के चलते भी अस्पताल में हर जगह मरीजों की भीड़ लगी रहती है। इसके बावजूद ओपीडी व अन्य विभागों में मरीजों की संख्या अनुसार बेंच नहीं रखवाए गए हैं। इससे मरीजों व उनके परिजनों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ता है।
^अस्पताल परिसर में बेंचों की संख्या कम होने का मामला संज्ञान में हैं। नए बेंच खरीदने की प्रक्रिया चलाई हुई है। जल्द ही अस्पताल परिसर में अतिरिक्त बेंच रखवा दिए जाएंगे, ताकि आमजन को कोई परेशानी न हो। डॉ. राजीव महेंद्रू, निदेशक, बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां।



