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नागा साधु की दीक्षा ग्रहण करने के बाद गोहाना के गढ़ी सराय नामदार खां गांव में 6 दिन से भू-समाधि में हैं दिवाकर भारती

न भोजन, न पानी, नग्न अवस्था में पूरा धड़ नीचे जमीन में, सिर हिला कर सवालों के जवाब देते हैं, तय नहीं कि कब समाधि से आएंगे बाहर, हरिद्वार से आशीर्वाद देने पहुंचे निरंजनी अखाड़े के महंत श्री श्री 1008 राजेंद्र भारती जी

 

गोहाना :-29 फरवरी: उड़ीसा मूल के 32 वर्ष के नवदीक्षित नागा साधु दिवाकर भारती 6 दिन से भू-समाधि में हैं। पूर्ण नग्न धड़ पूरा जमीन के अंदर है, केवल गर्दन और चेहरा ही बाहर हैं। न भोजन खा रहे हैं, न जल स्वीकार कर रहे हैं। मौन व्रत के चलते सवालों के जवाब सिर हिला कर देते हैं। यह तय नहीं है कि उनकी भू-समाधि कितने दिन चलेगी। गुरुवार को दिवाकर भारती को आशीर्वाद देने के लिए हरिद्वार से निरंजनी अखाड़े के महंत श्री श्री 1008 राजेंद्र भारती जी पहुंचे। दिवाकर भारती ने 24 फरवरी को पूर्णिमा के दिन स्थित संन्यास आश्रम में भू-समाधि प्रारंभ की। पहले हवन हुआ। हवन में आहुति दिवाकर भारती के गुरु भाई प्रशांत भारती और दयावान भारती के साथ भगवान परशुराम आश्रम के सुभाष शर्मा और सोशल एक्टिविस्ट जसबीर लठवाल ने डाली। भू-समाधि के समीप शिव लिंग स्थित है जिसके जलाभिषेक का पूरा जल वहीं समाता है जहां की कच्ची जमीन की मिट्टी को खोद कर दिवाकर भारती ने भू-समाधि ग्रहण की है। दिवाकर नागा साधु हैं। नागा साधू पूर्ण निर्वस्त्र रहते हैं। इसी के चलते भू-समाधि में लीन उनका धड़ भी नग्न अवस्था में है।

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6 दिन हो गए हैं अन्न का कण या पानी की कोई बूंद ग्रहण किए। इस के बावजूद दिवाकर भारती चैतन्य अवस्था में हैं। उनके चेहरे पर दिव्य ओजस्विता है। वह भू-समाधि से व्यथित नहीं, उसका पूर्ण आनंद ले रहे प्रतीत होते हैं। भू-समाधि के संग मौन व्रत भी धारण कर रखा है। ऐसे में मुख से बोलते एक शब्द तक नहीं है। लेकिन कोई कुछ पूछे तो सिर को हिला कर उसकी मुद्रा से हां या न भर में जवाब अवश्य देते हैं। दिनभर उनके दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

गुरुवार को आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के निदेशक डॉ.सुरेश सेतिया और मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी के साथ अध्यात्म में पी.एच.डी. करने वाले डॉ. समुद्र दास और धर्मबीर बरोदा भी पहुंचे।

हरिद्वार से दिवाकर भारती को आशीर्वाद देने के लिए निरंजनी अखाड़े के महंत श्री श्री 1008 राजेंद्र भारती जी भी पहुंचे। वह दिवाकर भारती के गुरु हैं। उनके अनुसार
दिवाकर भारती ने इसी वर्ष मकर संक्रांति पर हरिद्वार में नागा साधु की दीक्षा ग्रहण की। उन्होंने बताया कि जो भी दीक्षा ग्रहण करता है, उसे कठोर साधना से अपने तप को निखारना पड़ता है। इसी कड़ी में दिवाकर भारती ने भू-समाधि ग्रहण करने का निश्चय किया। उनके अनुसार दिवाकर भारती मूल रूप से उड़ीस प्रदेश के हैं।

भू-समाधि पर पूर्ण विराम कब लगेगा, इस के विषय में श्री श्री 1008 राजेंद्र भारती जी ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि दिवाकर भारती ने कितने दिन के लिए यह कड़ा तप करने की ठानी है। पर सोशल एक्टिविस्ट जसबीर लठवाल और भगवान परशुराम आश्रम के अध्यक्ष सुभाष शर्मा, जिन की उपस्थिति में दिवाकर भारती ने भू-समाधि प्रारंभ की, का कहना है कि दिवाकर भारती ने कहा था कि जब तक धरती मां चाहेगी, तब तक वह उसकी शरण में रहेंगे।

Khabar Abtak

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