गढ़ी सराय नामदार खा के सबसे गरीब प्रजापति ताजा कमाने, ताजा खाने वाले परिवार को किन्नरों ने सोने से लाद दिया
अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन : गढ़ी सराय नामदार खा के सबसे गरीब प्रजापति परिवार को चाक-पूजन के लिए बनाया यज्ञमान, परिवार के मुखिया का हो चुका है निधन, एक बेटा है दिव्यांग
गोहाना :-27 फरवरी: किन्नर केवल लेना भर नहीं जानते। वे देने में भी पूरे दरियादिल होते हैं। मंगलवार को इस की बानगी गोहाना ने तब देखी जब देश – विदेश के किन्नर एक ताजा कमाने और ताजा खाने वाले बेहद गरीब परिवार के यहां चाक–पूजन के लिए पहुंचे और उस परिवार को सोने के गहनों से लाद दिया।
गोहाना शहर में 24 फरवरी से अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन जारी है। यह सम्मेलन दस दिन का है। सम्मेलन 4 मार्च को पूर्ण होगा। इस सम्मेलन में न केवल भारत के कोने-कोने अपितु विदेशों से भी किन्नर पहुंचे हैं। मंगलवार को सम्मेलन ने चाक पूजन का आयोजन किया। इस आयोजन के लिए गढ़ी सराय नामदार खां गांव के सबसे गरीब प्रजापति परिवार का चयन किया गया। घर के मुखिया जय भगवान अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी पत्नी सुदेश जैसे-तैसे तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं। बड़ा बेटा सोमबीर है। उसका एक हाथ कटा हुआ है। छोटा बेटा अंकुर है। वह कक्षा 10 में पढ़ रहा है। सुदेश ने अपनी बहन की बेटी निशु को गोद ले रखा है।
महंत स्वीटी के साथ जो किन्नर स्व. जयभगवान के घर ढोल-नगाड़े के साथ पहुंचे, उस दल में पाकिस्तान के फैसलाबाद की आइना, दिल्ली के पहाड़गंज की कोकिला, करनाल की चांदनी, हापुड़ की राजकुंवारी, हरिद्वार की गुंजन, रुड़की की सपना, नोएडा की बसंती माई, आगरा की हरि माई, रेवाड़ी की ज्योति, सिरसा की कमलेश के साथ अनु, नंदिनी और महंत संजू पहुंचीं। गढ़ी सराय नामदार खां गांव की ओर से किन्नर दल को अभिषेक डॉ. अरुण सेनी और राम निवास सैनी ने किया।
चाक पर बर्तन बनाए जाते हैं। स्व. जयभगवान के घर में स्थित चाक पर हल्दी से सतिया बना कर उसकी पूरे विधि-विधान से आराधना की गई। ग्रामीणों की आंखें तब फटी की फटी रह गई जब किन्नरों ने अपने यज्ञमान पर सोना लुटाना प्रारंभ किया। 5100 रुपए की नकद दक्षिणा और पूरे परिवार के नए वस्त्रों के साथ सोने की अंगुठी, सोने के टॉप्स, सोने की नथनी, चांदी की पायल, चांदी की छुटकी आदि दिए गए।
महंत स्वीटी ने कहा कि किन्नर हमेशा सर्व समाज के हित की कामना करते हैं। वे बस इतना भर चाहते हैं कि कोई घर किलकारियों से वंचित न रहे और किसी के यहां भी गमों का डेरा न हो, बस, सब पर खुशियां ही खुशियां लगातार बरसती रहें।


