जैन संत आचार्य विद्यासागर जी के देवलोकगमन पर गोहाना के जैन स्कूल में जैन समाज ने श्रद्धा सुमन अर्पित किये
सम्पूर्ण विश्व में सर्वाधिक दीक्षाएं प्रदान करने वाले जैनेश्वरी गुरु थे विद्यासागर : जैन
गोहाना :-19 फरवरी: आचार्य विद्यासागर अपने जीवनकाल में सर्वाधिक दीक्षाएं प्रदान करने वाले जैनेश्वरी गुरु थे। सोमवार को यह खुलासा मेन बाजार के जैन, सीनियर सेकेंडरी स्कूल में इस स्कूल के मैनेजर वीरेंद्र जैन उर्फ गुल्लू ने किया। उनके अनुसार आचार्य विद्यासागर ने अपने जीवनकाल में पांच सौ से अधिक जैन संतों को दीक्षित किया।
वीरेंद्र जैन उर्फ गुल्लू आचार्य विद्यासागर के देवलोकगमन पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए हुई सभा की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर अंतिम सांस तक चैतन्य अवस्था में रहे तथा मंत्र उच्चारण करते हुए उन्होंने नश्वर देह का त्याग कर दिया।
उनका देहावसान चंद्र गिरी तीर्थ स्थल पर हुआ। जैन स्कूल के प्रिंसिपल के. एल. दुरेजा ने दिवंगत जैन संत के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार आचार्य विद्यासागर का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन 10 अक्तूबर 1946 को कर्नाटक के बेलगाम जिले के सदलावा गांव में हुआ। वह आचार्य ज्ञानसागर के शिष्य थे। वह केवल 26 साल की उम्र में 22 नवंबर 1972 को आचार्य बन गए थे। संलेखना स्वीकार करने से पहले उन्होंने आचार्य पद का त्याग कर दिया तथा समय सागर जी को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
दुरेजा ने रहस्योद्घाटन किया कि आचार्य विद्यासागर को 8 ही दिन पहले 11 फरवरी को सर्वाधिक दीक्षाएं प्रदान करने के लिए गिनीज बुक द्वारा सम्मानित किया गया था।
आचार्य विद्यासागर को शब्दांजलि वीरेंद्र जैन उर्फ भालू, संदीप जैन, संतोष जैन, सुशील बंसल और पंकज जैन ने प्रदान की। दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्मा के लिए मोक्ष की प्रार्थना की गई। जैन श्रद्धालुओं ने कहा कि आचार्य विद्यासागर के समाधि ग्रहण करने से समूचे विश्व को अपूर्णीय क्षति हुई है।
श्रद्धांजलि सभा में अशोक जैन, संजय जैन, विकास जैन, रवींद्र जैन, प्रदीप जैन, दीपक जैन, राजेश जैन, योगेश जैन, संजय जैन, धन कुमार जैन, त्रिशला जैन, भावना जैन, कुसुम जैन, उषा जैन, मंजू जैन आदि भी पहुंचे।


