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भारतीय संस्कृति के सूत्रधारों पर एसजीटीयू में गहन मंथन 

सामाजिक जीवन की प्राणवायु है लोक संस्कृति

 

गुरुग्राम, 05 जून । प्रज्ञा संस्थान तथा लोकायन संस्था, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में एसजीटी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम (हरियाणा) में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संशोधन परिषद का आयोजन किया गया। परिषद का विषय “भारतीय लोकसंस्कृति के लोकनायक-लोकनायिका की समाज के प्रति भूमिका एवं सामाजिक अवदान” रहा। इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय लोकजीवन, संस्कृति और सामाजिक चेतना के निर्माण में लोकनायकों एवं लोकनायिकाओं की भूमिका पर गंभीर अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित करना है।

परिषद का आयोजन महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती, राष्ट्रीय संत गाडगे महाराज की 150 वीं जयंती तथा भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा किए गए ऐतिहासिक सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से लोकसंस्कृति, लोकसाहित्य और सामाजिक इतिहास के क्षेत्र में कार्यरत प्राध्यापकों, शोधार्थियों, कलाकारों, अभ्यासकों तथा विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया।

परिषद का उद्घाटन एसजीटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) हेमंत वर्मा तथा प्रो-चांसलर प्रो. (डॉ.) बसुतकर जगदीश्वर राव ने किया। उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने भारतीय लोकसंस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और उसके सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकपरंपराएं केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि वे समाज की सामूहिक स्मृति, जीवन-मूल्यों और नैतिक चेतना की वाहक भी हैं। लोकनायकों एवं लोकनायिकाओं ने अपने संघर्ष, त्याग और जनसेवा के माध्यम से सामाजिक समरसता, जनकल्याण और सांस्कृतिक संरक्षण को सशक्त आधार प्रदान किया है।

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परिषद के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों, शोधपत्र प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श के माध्यम से लोकसंस्कृति, लोककला, लोकसाहित्य, सामाजिक परिवर्तन तथा सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विविध विषयों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने अपने शोध निष्कर्षों और अनुभवों को साझा कर भारतीय लोकपरंपराओं के विभिन्न आयामों को रेखांकित किया । परिषद का उद्देश्य इस क्षेत्र में हो रहे शोध, नवाचार और सामाजिक योगदान को एक साझा मंच प्रदान करना तथा विद्वानों, शोधकर्ताओं और जमीनी स्तर पर कार्यरत व्यक्तियों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है।

परिषद के अंतर्गत महाराष्ट्र और हरियाणा की लोककलाओं पर आधारित विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। दोनों राज्यों के लोक कलाकारों ने पारंपरिक संगीत, नृत्य और लोक अभिव्यक्तियों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। लोककलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार तथा हरियाणा सरकार द्वारा कलाकारों के दल इस आयोजन में सहभागिता के लिए भेजे गए। इन प्रस्तुतियों से प्रतिभागियों को दोनों राज्यों की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को निकट से समझने का अवसर मिला।

उद्घाटन समारोह में मुरारी शरण शुक्ल (केंद्रीय प्रमुख, हिंदू अध्ययन समूह, विश्व हिंदू परिषद), डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा (प्रॉक्टर, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन), देवेंद्र राय (न्यासी, प्रज्ञा संस्थान), डॉ. मोनिका ठक्कर (अध्यक्ष, लोकायन संस्था) तथा कमलाकांत पाठक (एसोसिएट डायरेक्टर, प्रज्ञा) सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

परिषद के माध्यम से भारतीय लोकसंस्कृति, लोकसाहित्य एवं लोककलाओं से जुड़े विविध आयामों पर राष्ट्रीय स्तर पर सार्थक संवाद को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही लोकनायकों एवं लोकनायिकाओं के सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय अवदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा उनके प्रेरणादायी कार्यों को अकादमिक विमर्श से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ।

समापन सत्र में विभिन्न तकनीकी सत्रों के निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए।

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