जैन गुरुदेव जय मुनि ने बुटाना गांव में कहा कि-धर्म कपड़े नहीं, शरीर की चमड़ी के समान

गोहाना :-धर्म कपड़े नहीं, शरीर की चमड़ी के समान है । जिस प्रकार से चमड़ी को कभी भी शरीर से नहीं उतारा जा सकता, उतने पक्के तौर से धर्म को जीवन में उतारें ताकि वह शरीर से कभी अलग न हो सके ।
यह संदेश रविवार की दोपहर जैन गुरुदेव जय मुनि ने दिया। वह बुटाना गांव में स्थित जैन स्थानक में प्रवचन कर रहे थे। गुरुदेव जय मुनि ने कहा कि विडम्बना यह है कि इंसान इंसान से नफरत, पर भगवान से प्यार करता है। लेकिन भगवान कहते हैं कि मुझ से प्यार करो या न करो, पर मेरे बनाए हुए इंसान से प्यार जरूर करो । उन्होंने कहा कि धर्म इंसान को इंसान से जोड़ने वाला धागा हे । इस धागे को कभी टूटने नहीं देना चाहिए । मानवता का पाठ यह है कि सबसे पहले अपने घर के सदस्यों का ध्यान रखें, उनसे प्यार से पेश आएं, उनसे स्नेह करें।
जय मुनि ने कहा कि एक व्यक्ति स्वाध्याय करता है, लेकिन दूसरा व्यक्ति अस्वस्थ है। स्वाध्याय करना अच्छी बात है, पर उससे भी अच्छी बात है बीमार आदमी की देखभाल | आदीश मुनि ने दान की महिमा का जिक्र किया ।
उन्होंने कहा कि अगर दो हाथों से कमाते हो तो सौ हाथों से दान करो। इस अवसर पर दिल्ली, पंचकूला, गोहाना के साथ पंजाब के मूनक शहर से भी श्रद्धालु पहुंचे।


