जैन मुनि जय ने कहा कि अपने दिल में दया का दीपक जलाएं, जिसके दिल में दया नहीं, उसे दिल मिला ही नहीं ।

गोहाना :-5 जुलाई : जैन मुनि जय ने शुक्रवार की दोपहर आह्वान किया कि अपने दिल में दया का दीपक जलाएं। उन्होंने कहा कि जिसके दिल में दया नहीं, उसे दिल मिला ही नहीं । जय मुनि बुटाना गांव के जैन स्थानक में प्रवचन कर रहे थे ।
जय मुनि ने कहा कि दयालु व्यक्ति अपने सुख को छोड़ कर दूसरे के सुख का ध्यान रखता है । उन्होंने जोर देकर कहा कि दया की शुरुआत अपने घर से होनी चाहिए। जैन मुनि जय ने अमेरिका के राष्ट्रपति रहे अब्राहम लिंकन के जीवन का एक दृष्टांत उद्धरित किया। उनके अनुसार लिंकन ने एक सूअर को कीचड़ में धंसे हुए देखा। उन्होंने स्वयं उस सूअर को कीचड़ से निकाला। इस पर जब उनसे पूछा गया कि यह काम तो आप का कोई सेवक भी कर सकता था, तब अब्राहम लिंकन ने जवाब दिया कि सूअर का दुख देख कर मुझे दुख हुआ, बस मैंने अपने दुख को दूर करने के लिए ऐसा किया ।
जय मुनि ने गुरुदेव सुदर्शन लाल के जीवन की एक घटना का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार सुदर्शन लाल जी उस समय दिल्ली में यमुना पार के प्रवास पर थे। एक मैरिज पैलेस में उनका प्रवचन था । लेकिन वहां नॉन-वेज पकता था। सुदर्शन लाल जी के निवेदन पर उस पैलेस के मालिक ने नॉन-वेज बंद कर दिया। कालांतर में उस मैरिज पैलेस के मालिक को उस पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिसके लिए वह बरसों बरस से तरस रहा था । जैन मुनि ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में दया को धारण करना चाहिए ।


