चंडीगढ़ के कथा व्यास और मानस मर्मज्ञ श्री श्री मुकंद हरि ने कहा कि भगवान खोजने से नहीं, खो जाने से मिलते हैं।
खोजने नहीं, खो जाने से मिलते हैं भगवान : श्री श्री मुकंद हरि
गोहाना :-25 जून : चंडीगढ़ के कथा व्यास और मानस मर्मज्ञ श्री श्री मुकंद हरि ने मंगलवार को कहा कि भगवान खोजने से नहीं, खो जाने से मिलते हैं। वह पुरानी अनाज मंडी के अग्रवाल सत्संग भवन में अपने प्रवास के दौरान श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रहे थे ।
श्री श्री मुकंद हरि को पहले चंडीगढ़ वापस लौट जाना था। लेकिन श्रद्धालुओं की प्रार्थना पर उन्होंने अपना प्रवास शनिवार तक के लिए बढ़ा दिया । कथा व्यास ने कहा कि यज्ञ केवल वह नहीं है जिसमें पवित्र सामग्री की आहुति डाली जाती हैं। लोकहित की भावना से किया जाने वाला प्रत्येक कार्य यज्ञतुल्य है ।
मानस मर्मज्ञ ने कहा कि एक पत्थर सीढ़ी का पत्थर होता है जिसे हर कोई ठोकर मारते हुए आगे बढ़ता है। लेकिन एक पत्थर वह होता है जो मंदिर के मुख्य द्वार पर लगा होता है और जिसे पूजा-अर्चना के लिए आने वाले भक्त सर्वप्रथम नमन करते हैं, उसकी धूलि से अपने मस्तक का अभिषेक करते हैं।


