व्याख्यान वाचस्पति मदन लाल जी की पुण्यतिथि पर गोहाना के टी.पी.एस. पब्लिक स्कूल मे श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन
श्रेष्ठ एवं वास्तविक संत थे व्याख्यान वाचस्पति : सुंदर मुनि
गोहाना :-23 जून : व्याख्यान वाचस्पति मदन लाल श्रेष्ठ एवं वास्तविक संत थे। रविवार को यह टिप्पणी शेर-ए-हिंद सुंदर मुनि ने उनकी पुण्यतिथि पर वजीरपुरा गांव में स्थित टी.पी.एस. पब्लिक स्कूल में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में की। इस समारोह की मेजबानी अंबाला और रोहिणी के जैन श्रद्धालुओं ने की ।
व्याख्यान वाचस्पति ने 27 जून 1962 को देवलोक के लिए प्रस्थान किया था। लेकिन रविवार के चलते उनकी पुण्यतिथि पर उनको नमन चार दिन पहले कर लिया गया। कार्यक्रम के लिए सानिध्य उनके एकमात्र जीवित शिष्य और 96 साल के गच्छाधिपति प्रकाश चंद जी का रहा। उन्हें शेर-ए-हिंद सुंदर मुनि अपने कंधों पर बैठा कर लाए तथा मंच पर प्रतिष्ठित किया । गच्छाधिपति ने भारी संख्या में दूर-दूर से पहुंचे जैन श्रद्धालुओं के कल्याण के लिए मंगल पाठ सुनाया ।
श्रद्धांजलि समारोह के लिए तत्वावधान आर्य वज्र स्वाध्याय संघ का रहा। अध्यक्षता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम कुमार जैन ने की तथा संचालन राष्ट्रीय महासचिव प्रतिभा जैन ने किया। मुख्य वक्ता शेर-ए-हिंद सुंदर मुनि ने कहा कि व्याख्यान वाचस्पति कहते थे कि विनयी व्यक्ति की धर्मशील है। जो अपने से बड़ों की विनय नहीं करते, उनसे लक्ष्मी और सौभाग्य रूठ जाते हैं । इस अवसर पर जैन विभूतियों में वेद प्रकाश जैन, सतीश जैन, अश्विनी जैन, घनश्याम जैन आदि भी उपस्थित रहे ।


