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भिवानी स्थित राधा स्वामी दिनोद के प्रमुख कंवर साहब जी ने गोहाना में फ़रमाया-संपत्ति नहीं, संतति को करो ठीक, केवल जरूरतें पूरी करो, इच्छाएं नहीं

 

गोहाना :-31 मार्च : संपत्ति नहीं, संतति को ठीक करो। अपने बच्चों की इच्छाएं नहीं, केवल जरूरतें ही पूरी करो | अगर आपकी सन्तान ही बिगड़ गई तो ये कमाया हुआ धन क्या काम आएगा । माता पिता बड़े-बुजुर्गों की कद्र करो ताकि आपकी सन्तान भी आपसे यह संस्कार सीखें।

रविवार को यह फरमाया भिवानी स्थित राधा स्वामी दिनोद के प्रमुख कंवर साहब जी ने। वह गोहाना में पानीपत रोड पर स्थित आश्रम में प्रवचन कर रहे थे । गुरु महाराज जी ने कहा कि जो रूहानी खुराक हमें जिन्दा गुरु
से मिलती है, वह मूर्ति पूजा या मंदिर,मस्जिद या घाटों पर नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा इस जगत में कोई सुखी नहीं है। हम दुनिया के पदार्थों को ही सुख मान लेते हैं। सुख है तो नाम की कमाई में है । उन्होंने कहा कि सुमिरन भी कई प्रकार है। एक है स्वयं की स्वार्थपूर्ति के लिए, दूसरा है किसी के अनिष्ट के लिए और तीसरा है रूह के कल्याण के लिए ।

कंवर साहब ने कहा कि अहंकार का फंदा हर गले में है। किसी को पद का, किसी को दौलत का तो किसी को शक्ति का अहंकार आ जाता है । यहीं अहंकार आपको गिराता है।गुरु की शरण से इंसान अहंकार से मुक्त होता है। गुरु महाराज जी ने फरमाया कि बुराई की कोई
पाठशाला नहीं है, फिर भी हम बुराई को जल्दी सीख जाते हैं क्योंकि हमारे अंदर की नकारात्मक शक्तियां पहले से सक्रिय होती हैं । सन्त की शरण नकारात्मक को सकारात्मक में बदलती है।

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कंवर साहब जी ने कहा कि कि परमात्मा अविनाशी है क्योंकि वह अटल, अजर, अमर है । पिया वरो तो परमात्मा को वरो ताकि हम सदा सुहागन रहें।उन्होंने कहा कि खाना, पीना, हंसना, सजना, संवरना-वास्तव में मुर्दे का ही शृंगार है। अगर समय रहते चेत जाओगे तो सुख ही सुख है। ये जीवन एक सपने की भांति है आंख खुली कि सपना खत्म ।

गुरु महाराज जी ने संगत से पूछा कि क्या राम का नाम लेना कठिन है। कठिन तो हम बनाते हैं। राम तो घट-घट में व्याप्त है और कलियुग में तो ये और भी आसान है। इसे आठ साल का बच्चा भी कर सकता है और साठ साल का बूढ़ा भी । गुरु महाराज जी ने कहा कि जिन्होंने अपनी खुदी को गंवा दिया, उन्होंने सब कुछ पा लिया। ये चिंता मत करो कि क्या होगा । ये मान कर चलो कि अच्छा करोगे तो अच्छा ही होगा। वर्तमान में जियो क्योंकि एक पल का भी भरोसा नहीं है।

कंवर साहब ने चेताया कि नाम को बिसारना आत्मघात करना है। परमात्मा के नाम की कमाई ना करना सबसे बड़ा आत्मघात करना है। गुरु की शरण लो तो मन, वचन और कर्म से किसी को कष्ट मत दो |

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