गोहाना के मुख्य गुरुद्वारे में गुरु हरिकिशन के ज्योति ज्योत दिवस समारोह का आयोजन
5 साल की उम्र में ही बाला पीर ने संभाल ली थी गद्दी : डॉ. सेतिया
गोहाना :-30 मार्च: अष्टम पातशाही गुरु हरिकिशन बाला पीर के रूप में प्रसिद्ध थे। उन्होंने पांच वर्ष की आयु में ही गुरु गद्दी संभाल ली थी। शनिवार को यह खुलासा श्री गुरु सिंह सभा के महासचिव डॉ. सुरेश सेतिया ने किया । वह गुरु हरिकिशन के ज्योति ज्योत दिवस पर मुख्य गुरुद्वारे में उन्हें श्रद्धासुमन भेंट कर रहे थे।
अध्यक्षता श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार काबुल सिंह ने की। संयोजन आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने किया।मुख्य वक्ता डॉ. सुरेश सेतिया ने कहा कि गुरु हरिकिशन बाल्यकाल से गंभीर और सहनशील प्रवृत्ति के थे। उन्होंने छोटी उम्र में आध्यात्मिक साधना प्रारंभ कर दी थी। उनके गुरु हरि राय उनकी कठिन परीक्षा लेते रहते थे। जब वह गुरु बाणी का पाठ कर रहे होते थे, तब गुरु हरि राय उनको सुई चुभोते, पर वह गुरबाणी के पाठ में मग्न रहते। दिल्ली में चेचक से पीड़ित लोगों की जान बचाते हुए उन्होंने 30 मार्च 1664 को अपने प्राणों की आहुति दे दी ।
सरदार काबुल सिंह ने कहा कि गुरु हरिकिशन ने तत्कालीन समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाई। इस अवसर पर भाई रणजीत सिंह, जगत सिंह, केसर दास, सोमनाथ चावला, जगदीश चिंदा, रमेश मेहता, हरभगवान चोपड़ा, सुभाष शर्मा, कश्मीरी लाल बावा, सुरेश कुमार आदि भी उपस्थित रहे।


