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गच्छाधिपति ने किया संलेखना के 9वें वर्ष में प्रवेश

टी. पी. एस. पब्लिक स्कूल में हुए उत्सव में देश के 50 जैन संघों के प्रतिनिधियों ने उनको नमन किया।

गोहाना :-26 मार्च : 96 वर्ष के गच्छाधिपति और जैन धर्म के श्लाका पुरुष के रूप से सबसे बड़े संत प्रकाश चंद जी महाराज संलेखना के 9वें वर्ष में प्रविष्ट हो गए वजीरपुरा गांव स्थित टी. पी. एस. पब्लिक स्कूल में हुए उत्सव में देश के 50 जैन संघों के प्रतिनिधियों ने उनको नमन किया।

आर्य वज्र स्वाध्याय संघ के उत्सव में स्वयं गच्छाधिपति प्रकाश चंद जी मंचासीन रहे तथा उन्होंने जैन श्रद्धालुओं को मंगल पाठ से कृतकृत्य भी किया। अध्यक्षता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम कुंवार जैन तथा संचालन राष्ट्रीय महासचिव प्रतिभा जैन के पंजाब के रायकोट की नीलम जैन ने किया।

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प्रकाश चंद जी पूरे जैन समाज में सबसे बड़ी आयु ही नहीं, सबसे लंबे समय की दीक्षा वाले संत भी हैं। उनका जन्म 1 जनवरी 1929 को गोहाना के रिंढ़ाणा गांव तथा दीक्षा 18 जनवरी 1945 को नारनौल में हुई। उनके पिता संथारा साधक बद्री प्रसाद जी और छोटे भाई भगवन श्री राम प्रसाद भी संथारा के माध्यम से इच्छा मृत्यु का वरण कर चुके हैं। गच्छाधिपति स्वयं उसी पथ अनुगामी 23 मार्च 2016 को बन गए।

संलेखना ग्रहण करने के 8 वर्ष पूरे होने तथा 9 वें वर्ष में प्रवेश पर शेर-ए-हिंद सुंदर मुनि ने कहा-संलेखना के माध्यम से गच्छाधिपति ने सीधे तौर से मृत्यु को चुनौती दी है |इतिहास में अब से पहले किसी भी जैन संत की संलेखना इतनी लंबी नहीं चली है। एक दिन की संलेखना एक लाख दिन के तप के तुल्य है।

कार्यक्रम में सुशील मुनि, लाभ मुनि और संयति मुनि भी विराजमान रहे। तेज बुखार के बावजूद गच्छाधिपति और शेर-ए-हिंद कार्यक्रम में आसीन हुए। इस अवसर पर एस. एस. जैन सभा के निवर्तमान अध्यक्ष वेद प्रकाश जैन समेत बड़ी संख्या में जैन प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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