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गोहाना के श्रीरामशरणम आश्रम में 90 दिन से चल रहे अखंड जप यज्ञ का समापन

कामनाओं की पूर्ति ही है कामनाओं की जननी : कृष्ण विज जी

 

गोहाना :-10 मार्च : कामनाओं की पूर्ति की कामनाओं की जननी है। एक कामना पूरी होती है तो अगली कामना दस्तक दे देती है। कामनाओं की प्यास कभी बुझती नहीं वरन उत्तरोत्तर बढ़ती ही जाती है। रविवार को यह संदेश श्रीरामशरणम मिशन के प्रमुख पूज्य पिता कृष्ण विज जी ने दिया। वह जींद रोड पर स्थित श्रीरामशरणम मंदिर में 90 दिन से चल रहे अखंड जप यज्ञ का समापन कर रहे थे। अमृत वाणी का मधुर पाठ गुरु मां रेखा विज जी ने किया।

उन्होंने कहा कि हम सोचते हैं कि दुख कटेंगे तो प्रसन्नता मिलेगी। लेकिन श्रीमद्भागवत गीता के एक श्लोक के हवाले से उन्होंने कहा कि प्रसन्नता से दुख गल जाते हैं।

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कृष्ण विज जी ने कहा कि कभी भूल कर भी मत कहो कि मुझे भगवान ने कुछ नहीं दिया। प्रार्थना यह करो कि जो मुझे दिया, वह सब को मिले। उन्होंने कहा कि भगवान में भरोसा अटल, अडिग और संदेह रहित होना चाहिए।

श्रीरामशरणम प्रमुख ने संशय रहित जीवित निश्चय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि या तो कहो, ईश्वर है। या कहो, नहीं है, बीच में मत लटके रहो। कृष्ण विज जी ने सवाल किया कि धन अर्जित नहीं करोगे तो दान कैसे करोगे ? स्वास्थ्य अच्छा नहीं होगा तो सेवा कैसे करोगे? उन्होंने कहा कि केवल भक्ति का मार्ग एक ऐसा मार्ग है जिससे आप अपने आप को जान सकते हो। उनके अनुसार विश्वास से श्रद्धा पनपती है, श्रद्धा के साथ तपने से भक्ति का उदय होता है।

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