जो जर-जोरु-जमीन का त्यागी, वह ही गुरु : जय मुनि जी

गोहाना :-21 जुलाई : जैन संत जय मुनि जी ने रविवार को कहा कि जो जर-जोरू जमीन का त्याग कर देता है, वह ही गुरु है । वह गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर जैन स्थानक में पहुंचे श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रहे थे ।
उनके अनुसार गुरु अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाला होता है। जो गुणों में भारी होता है, वह गुरु होता है। जीवन में गुरु का होना इसलिए आवश्यक है कि गुरु की सन्मार्ग पर चलाता है। गुरु पूर्णिमा वह उत्सव है जिस दिन हर शिष्य अपने गुरु के चरणों में उपस्थित हो कर अपनी बुराइयों को छोड़ने और भविष्य में शुद्ध बनने का संकल्प स्वीकार करता है।
जय मुनि जी ने कहा कि एक अरस्तु 100 सिकंदर तैयार कर सकता है, लेकिन सौ सिकंदर मिल कर भी एक अरस्तु तैयार नहीं कर सकते । गुरु की भक्ति करने वाला अपना कल्याण कर लेता है। जो गुरु के दिल में अपना स्थान बना लेता है, वह सब विघ्न-बाधाओं पर विजय प्राप्त कर लेता है।


