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गोहाना में आयोजित भगवन श्री के 17वें स्मृति दिवस पर बड़ी संख्या में पूरे उत्तर भारत से भगवन धाम पहुंचे जैन श्रद्धालु

फूल से भी कोमल, पर वज्र से भी कठोर थे राम प्रसाद जी : सुंदर मुनि

गोहाना :-18 जुलाई : शेर-ए-हिंद सुंदर मुनि ने गुरुवार को कहा कि भगवनश्री के उप नाम से प्रसिद्ध राम प्रसाद जी विनम्रता में फूलों से भी कोमल थे तो सिद्धांतों के प्रति कटिबद्धता को ले कर वज्र से भी कठोर थे। वह भगवन श्री के 17वें स्मृति महोत्सव पर वजीरपुरा गांव में टी.पी.एस. पब्लिक स्कूल में स्थित भगवन धाम में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आर्य वज्र स्वाध्याय संघ के तत्वावधान में हुए आयोजन में पूरे उत्तर भारत से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु पहुंचे।

यह संयोग ही है कि राम प्रसाद जी का जन्म गोहाना के रिंढ़ाणा गांव में हुआ तथा संथारा के माध्यम से उन्होंने 18 जुलाई 2007 को नश्वर देह का परित्याग गोहाना की पुरानी अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में किया। इससे पहले उनके पिता संथारा साधक बद्री प्रसाद जी का संथारा से देवलोक के लिए गमन 16 अक्तूबर 1987
को सोनीपत में हुआ था । राम प्रसाद जी के बड़े भाई और गच्छाधपति प्रकाश चंद जी भी 23 मार्च 2016 से संथारा की संलेखना पर चल रहे हैं ।

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अपने छोटे भाई के स्मृति दिवस महोत्सव में 96 साल के गच्छाधिपति का सानिध्य रहा। अध्यक्षता आर्य वज्र स्वाध्याय संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम कुमार जैन ने की तथा संचालन राष्ट्रीय महासचिव प्रतिभा जैन ने किया। हिसार के श्याम लाल जैन, चुलकाना धाम के प्रवीण जैन और रिंढ़ाणा के कमल जैन को सम्मानित किया गया ।

उस समय जैन श्रद्धालुओं के नेत्र अश्रुपूरित हो उठे जब भगवनश्री की अपनी आवाज में एक पुराना रिकॉर्ड से एक मधुर भजन बजा तराना-ए-गुरु मदन की डॉक्यूमेंट्री का भी विमोचन किया गया। दिल्ली, करनाल और मुंडलाना की महिला श्रद्धालुओं ने भगवन श्री राम प्रसाद जी को गीतों के माध्यम से नमन किया। अर्हम जैन, यशी प्रतिभा जैन, इशु बंसल और तनु दूहन ने अपनी प्रस्तुतियों से नमन किया ।

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