जर्जर भवन, सुविधाओं के अभाव के चलते विद्यार्थी बरोदा के कॉलेज में दाखिला लेने से हिचक रहे हैं
दो सूचियां लग चुकी हैं, 10 ही ने लिया है बरोदा के कॉलेज में दाखिला

गोहाना :-17 जुलाई : जर्जर भवन और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के साथ प्राध्यापकों का अपर्याप्त होना बरोदा गांव में स्थित गवर्नमेंट कॉलेज के लिए इस सीमा तक अभिशाप बन गया है कि दो सूचियां लग गई हैं, लेकिन अभी तक गिनती के 10 विद्यार्थियों ने ही दाखिला लिया है। कॉलेज के प्राध्यापक ही कह रहे हैं कि कॉलेज में इसी सत्र से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करना मुमकिन प्रतीत नहीं हो रहा है ।
बरोदा गांव के सरकारी कॉलेज के पास आधारभूत ढांचा तक उपलब्ध नहीं है। गांव के सरकारी हाई स्कूल के टूटे-फूटे भवन के गिनती के कमरों में यह कॉलेज चल नहीं, घिसट रहा है। हर पल यह आशंका बनी रहती है कि जाने कब बिल्डिंग गिर जाए तथा कितनी जिंदगियां एक साथ लील ले। इस के लिए कॉलेज प्रशासन उच्चतर शिक्षा विभाग को बार-बार सेफ भवन में शिफ्ट करने के लिए आग्रह कर रहा है, लेकिन विभाग कुंभकर्णी निद्रा में सोया हुआ है और शायद बड़ा हादसा होने पर ही जागेगा। कॉलेज में प्राध्यापक भी पर्याप्त संख्या में नियुक्त नहीं हैं। प्रमुख विषयों के प्राध्यापकों के पद पर खाली पड़े हैं। यह तथ्य भी अहम है कि इस कॉलेज के नजदीकी कॉलेजों, गोहाना, बुटाना, बड़ौता और भैंसवाल कलां में स्थित हैं, में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस के चलते विद्यार्थी वहां दाखिला लेने को बेहतर समझ रहे हैं।
कॉलेज के जो हालात हैं, उनके चलते इसी सत्र में नई शिक्षा नीति लागू होना भी कठिन लगने लगा है। उच्चतर शिक्षा विभाग को 7 पत्र लिखे जा चुके हैं । लेकिन जर्जर भवन से कॉलेज को अन्यत्र शिफ्ट नहीं किया जा रहा है। सुविधाओं का अभाव इस हद तक है कि इस कॉलेज में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को इसी सत्र से लागू करना मुमकिन ही नहीं लग रहा है।
पवन लठवाल, वाइस प्रिंसिपल, गवर्नमेंट कॉलेज, बरोदा


